देश में कोरोना संक्रमण के 3,33,012 मामले, अब तक नौ हजार से ज्यादा की मौत

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देशभर में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमितों की संख्या के मामले से भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है और दुनिया का चौथा सबसे प्रभावित देश बन गया है। देश में कोरोना संक्रमितों का संख्या बढ़कर 3,33,012 हो गई है। Covid19india.org के मुताबिक, भारत में कोरोना के अभी 1,53,762 एक्टिव मामले हैं। जबकि 1,69,691 लोग स्वस्थ या डिस्चार्ज हो चुके हैं। वहीं मरने वालों की संख्या 9,520 हो गई है। राजधानी दिल्ली और महाराष्ट्र में भी हालात बेहद गंभीर है। अकेले महाराष्ट्र में संक्रमितों का आंकड़ा एक लाख को पार कर गया है।

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,07,958

देश में कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज महाराष्ट्र में हैं। महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 3390 मामले दर्ज किए गए और 120 लोगों की मौत हो गई। राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 1,07,958 हो गई है। राज्य में एक्टिव केस की संख्या 53,017 है और 50,978 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा प्रभावित आर्थिक राजधानी मुंबई है। मुंबई में अब तक कुल 58,226 लोगों को कोरोना हो चुका है। अब तक 2,182 लोगों की मौत हो चुकी है।

राजधानी दिल्ली में अब तक 1327 लोगों की मौत

वहीं, राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां कुल संक्रमितों की संख्या 41,182 हो गई है। अब तक दिल्ली में 15,823 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना वायरस से अबतक दिल्ली में 1327 लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी में अभी 24,032 सक्रिय मामले हैं। रविवार रात को जारी हुई हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में बीते 24 घंटे में 2224 लोगों में कोविड-19 की पुष्टि हुई है। यह दिल्ली में अबतक की सर्वाधिक संख्या है। इससे पहले शुक्रवार को सबसे ज्यादा 2137 मामले सामने आए थे। दिल्ली के हालात देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, एलजी अनिल बैजल के साथ शनिवार को बैठक की। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी शामिल थे।

इंदौर में 24 घंटे में सिर्फ 6 नए मामले आए सामने

मध्यप्रदेश के इंदौर के लिए एक राहत की खबर आई है। शहर में 24 घंटे में सिर्फ 6 नए मामले सामने आए हैं। अब राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 4069 है। जबकी मृतकों की कुल संख्या 174 हो गई है। इंदौर जिले के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी ने इस खबर की जानकारी दी है।

असम में बीते 24 घंटे में 149 नए मामले  

असम में बीते 24 घंटे में कोरोना वायरस के 149 और नए मामले सामने आने से राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 4,049 हो गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बात की जानकारी दी है।

मणिपुर में बढ़ रही कोरोना मामलों की संख्या

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि प्रदेश में सकारात्मक मामलों की संख्या बढ़ रही है लेकिन सौभाग्य की बात यह है कि यह वायरस समुदाय के माध्यम से संचारित नहीं हो रहा है।

भारत दुनिया में चौथा सबसे प्रभावित देश बना

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या अमेरिका, ब्राजील, रूस के बाद सबसे ज्यादा है। कोरोना प्रभावित देशों में भारत चौथे स्थान पर आ गया है। भारत से अधिक मामले अमेरिका (2,162,144), ब्राजील (867,882), रूस (528,964) में हैं। अमेरिका और ब्राजील के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा मामले भारत में दर्ज किए जा रहे हैं।

पांच राज्यो में सबसे ज्यादा एक्टिव केस

महाराष्ट्र में 53 हजार से ज्यादा संक्रमितों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इसके बाद दूसरे नंबर पर दिल्ली, तीसरे नंबर पर तमिलनाडु, चौथे नंबर पर गुजरात और पांचवे नंबर पर पश्चिम बंगाल है। इन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं।

कोरोना वायरस लॉकडाउन: क्या फिर से हो सकता है सब कुछ बंद?

देश में एक बार फिर लॉकडाउन लागू करने की अटकलें लगातार सामने आ रही हैं. हालांकि अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली बैठक में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री उनसे शहरी कंटेनमेंट ज़ोन में प्रतिबंधों में छूट न देने की बात कह सकते हैं. अख़बार ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा कि प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों को यह निर्देश दे सकते हैं कि शहरी कंटेनमेंट ज़ोन में घर-घर जाकर टेस्ट किए जाएं और सोशल डिस्टेंसिंग, फ़ेस मास्क और दूसरे ज़रूरी एहतियात बरतने के लिए सख़्ती लाई जाए. केंद्र सरकार को यह फीडबैक मिला है कि बीते कुछ समय में कई राज्यों में स्थिति बिगड़ी है. प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक 16 और 17 जून को होनी है. इसमें दूसरे दिन उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक होगी जो कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित हैं. अख़बार से एक अधिकारी ने कहा, ”बैठक में प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों से सुझाव मांग सकते हैं और उनके आधार पर एक कॉमन स्ट्रैटेजी बनाई जाएगी. फिर से पूरी तरह लॉकडाउन लागू करने की कोई योजना नहीं है. संक्रमण से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है सोशल डिस्टेंसिंग को अपनाया जाए.”

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बच्चों को नहीं लग रहे टीके, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

देशभर में लागू लॉकडाउन की वजह से 25 मार्च से रुके हुए ज़रूरी टीकाकरण को राजधानी दिल्ली में 6 मई को फिर से शुरू कर दिया गया लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी पिछड़े तबके के परिवारों के बच्चे अब भी इससे वंचित हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक विशेष रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया है कि किस तरह लॉकडाउन की वजह से बच्चों के टीकाकरण में देरी हो रही है और आगे चलकर उनके स्वास्थ्य के लिए बड़ा ख़तरा भी हो सकता है. अख़बार लिखता है, राष्ट्रीय राजधानी में भी 6 मई को प्रतिरक्षण अभियान फिर से शुरू कर दिया गया था लेकिन जानकारी की कमी, स्टाफ़ की कमी और अधिकतर आशा वर्कर्स के कोविड-19 ड्यूटी में लगे होने की वजह से ज़रूरी टीकाकरण में देरी हो रही है. पिछड़े तबके के कई परिवारों के बच्चों को ज़रूरी टीके नहीं लग सके जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी ख़तरा मंडरा रहा है. यही नहीं, लॉकडाउन के दौरान बहुत सी महिलाओं को घर पर ही डिलिवरी करनी पड़ी क्योंकि वो अस्पताल तक जा नहीं सकीं. इसकी वजह से नवजात को दिए जाने वाले बीसीजी टीके भी नहीं लग सके. यह टीका बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाता है और रोग प्रतिरोधक का काम करता है.

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नवंबर में शीर्ष पर हो सकती है कोरोना महामारी

भारत में आठ हफ़्ते के लॉकडाउन की वजह से कोरोना महामारी के संक्रमण का शीर्ष करीब 34 से 76 दिन आगे बढ़ गया है. लॉकडाउन ख़त्म होने तक संक्रमण के मामलों में करीब 69 से 97 फ़ीसदी तक गिरावट भी रही है. यह दावा किया एक नई स्टडी में किया गया है. द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह स्टडी इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से बनाए गए एक ऑपरेशन रिसर्च ग्रुप ने की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन ने महामारी के शीर्ष स्तर को 34 से 76 दिन आगे धकेल दिया है. साथ ही संक्रमण के मामलों में भी कमी लाई है जिससे सरकार को स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरी तैयारियां करने और हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुधारने का मौका मिल गया. लॉकडाउन के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को देखते हुए देशभर में आबादी और संक्रमण के लिहाज से इलाज के लिए जो ज़रूरी तैयारियां हैं वो नवंबर के पहले सप्ताह तक पूरी हो सकती हैं. इसके बाद आइसोलेशन बेड 5.4 महीने के लिए अपर्याप्त हो सकते हैं जबति आईसीयू बेड 4.6 महीने के लिए और वेंटिलेटर 3.9 महीने के लिए, अपर्याप्त हो सकते हैं. यह अनुमान रिसर्च में दिखाया गया है.

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