बिहार में संदिग्ध एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के कारण पिछले बारह दिनों में मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 54 हो गई है। जबकि पिछले 50 घंटों में 36 बच्चों की मौत हो गई है। हालांकि, राज्य के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एईएस के कारण केवल 11 मौतें हुई थीं। आधिकारिक आंकड़ों ने इस साल एईएस मामलों की संख्या को 48 बताया है, जबकि पिछले साल 40 मामले पाए गए थे।

राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को स्थिति को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है। लेकिन बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने स्पष्ट रूप से कहा कि ज्यादातर मौतें हाइपोग्लाइकेमिया (रक्त में शर्करा की कमी) के कारण हुईं और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से केवल एक बच्चे की मौत हुई।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने शुक्रवार सुबह मुजफ्फरपुर में श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) का दौरा किया। एक्यूट एन्सिफेलाइटिस सिन्ड्रोम (AES) के चलते मरने वालों की तादाद 54 हो चुकी है, जिनमें से 46 की मौत SKMCH में तथा आठ लोगों की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है।

दूसरी ओर, प्रधान स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि इस साल एईएस से 11 बच्चों की मौत हो गई। एक-एक मौत अप्रैल और मई में और नौ मौतें जून के पहले सप्ताह में हाइपोग्लाइकेमिया की वजह से हुई थी। उन्होंने बताया कि अब तक एईएस और जेई के 27 मामले प्रकाश में आ चुके हैं।

इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग कड़ी निगरानी रख रहा है और लोगों को निवारक उपायों के बारे में निर्देश दिया है। “बारिश (मानसून) में  हर साल यह बीमारी कहर ढाती है। यह चिंता की बात है कि हर साल इसके कारण बच्चों की मौत हो जाती है।”

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

स्वास्थ्य विभाग ने एक एडवाइजरी भी जारी की है जिसमें जब माता-पिता को कहा गया है कि तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस रहने पर अपने बच्चों को धूप में खेलने से रोकना चाहिए।

क्या है एईएस?

एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम मच्छरों द्वारा प्रेषित एन्सेफलाइटिस का एक गंभीर मामला है। एईएस का प्रकोप उत्तर बिहार के जिलों में और इसके आसपास के क्षेत्रों में गर्मियों के मौसम में आम है। यहां इस बीमारी को “चमकी बुखार” या “मस्तिष्क बुखार” के नाम से जाना जाता है। ये महामारी ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चों को प्रभावित करती है जो 10 वर्ष से कम उम्र के हैं।

एईएस के लक्षण अस्पष्ट होते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इसमें दिमाग में ज्वर, सिरदर्द, ऐंठन, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं होतीं हैं। शरीर निर्बल हो जाता है। बच्‍चा प्रकाश से डरता है। कुछ बच्चों में गर्दन में जकड़न आ जाती है। यहां तक कि लकवा भी हो सकता है।

डॉक्‍टरों के अनुसार इस बीमारी में बच्चों के शरीर में शर्करा की भी बेहद कमी हो जाती है। बच्चे समय पर खाना नहीं खाते हैं तो भी शरीर में चीनी की कमी होने लगती है। जब तक पता चले, देर हो जाती है। इससे रोगी की स्थिति बिगड़ जाती है।

केंद्र ने उच्च-स्तरीय टीम का गठन किया

केंद्र ने एक बहु-विशेषज्ञ उच्च-स्तरीय टीम का गठन किया है, जो मुजफ्फरपुर में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के बढ़ते मामलों और प्रबंधन में राज्य सरकार की सहायता के लिए बुधवार को बिहार का दौरा करेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, जिन्होंने मंगलवार को बिहार में एईएस और जेई मामलों की स्थिति की समीक्षा की, ने कहा कि उन्होंने हाल ही में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से मुलाकात की और उन्हें केंद्र द्वारा पूर्ण समर्थन और सहायता का आश्वासन दिया।

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