उधर, दिल्ली में आखिर तक कोशिशों के बावजूद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठबंधन नहीं हो पाया

दिल्ली में आखिरी समय तक कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच गठबंधन की कोशिशें चलीं. इस प्रक्रिया में आप की ओर से लगातार यह बात आई कि वह हरियाणा और चंडीगढ़ में भी कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहती है. उधर, कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर यह बयान आया कि वह पहले दिल्ली में गठबंधन पक्का करने की पक्षधर है और इसके बाद ही किसी अन्य राज्य के लिए बात करेगी. हालांकि आखिर तक कोशिश के बावजूद दिल्ली में दोनों पार्टियों में गठबंधन नहीं हो सका. इस बीच अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप ने हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा कर दी.

अब कांग्रेस सूत्रों से यह जानकारी मिल रही है कि कांग्रेस हरियाणा में गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी से कोई बातचीत करने को भी तैयार नहीं थी. आप ने चाहे जो भी कोशिश की हो, लेकिन हरियाणा कांग्रेस के ताकतवर नेताओं ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर यह दबाव बनाए रखा कि हरियाणा में गठबंधन को लेकर आप से कोई बात ही नहीं करनी है. प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं ने जब गठबंधन पर बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव दिया तो उसी दौरान अरविंद केजरीवाल ने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके इस बातचीत की रही-सही संभावनाओं को भी खत्म कर दिया.

इस बारे में कांग्रेस के एक नेता बताते हैं, ‘प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का खेमा केंद्रीय नेतृत्व पर यह दबाव बनाए हुए था कि आप से गठबंधन करने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर आप के साथ गठबंधन की संभावनाओं को टटोलने की बात कर रहे थे. लेकिन केंद्रीय नेतृत्व पर हुड्डा भारी पड़े और दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको समेत दूसरे कांग्रेसी नेताओं ने भी आप से साफ कह दिया कि हरियाणा में गठबंधन पर कोई बातचीत नहीं होगी.’

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर पार्टी पर आप से गठबंधन नहीं करने के लिए दबाव बनाने में सफल रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा क्यों गठबंधन के इतने बड़े विरोधी हो गए? कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने पर इसकी दो वजहें सामने आती हैं. एक नेता अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताते हैं, ‘भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद को हरियाणा में अभी जाट समाज का सबसे बड़ा नेता मानते हैं. भविष्य में वे इस भूमिका में अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को देखते हैं. लेकिन आम आदमी पार्टी जिस तरह से गठबंधन में दुष्यंत चौटाला को लाने की कोशिश कर रही थी, उससे भूपेंद्र हुड्डा सहमत नहीं थे. दुष्यंत को प्रदेश के नौजवानों से अच्छा साथ मिल रहा है. ऐसे में अगर उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर ठीक-ठाक प्रदर्शन करती तो भविष्य में दीपेंद्र हुड्डा के लिए वे एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं.’

भूपेंद्र हुड्डा की दूसरी आपत्ति के बारे में में वे बताते हैं, ‘भूपेंद्र हुड्डा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को यह समझाने में कामयाब हुए कि हरियाणा में पार्टी का कैडर ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोक दल के कार्यकर्ताओं से संघर्ष करके खड़ा हुआ है. दुष्यंत चौटाला की पार्टी आईएनएलडी की ही उपज है. ऐसे में अगर कांग्रेस इसके साथ मिलकर चुनाव में उतरती है तो कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय को लेकर काफी परेशानी होगी और कांग्रेस को इसका भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.’

कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी सोनीपत सीट जीतने को लेकर आश्वस्त हैं. हालांकि, जननायक जनता पार्टी ने उन्हें घेरने के लिए यहां चौटाला परिवार के दिग्विजय चौटाला को मैदान में उतार दिया है. पिछली बार इस सीट से भाजपा को जीत हासिल हुई थी. ऐसे में सोनीपत सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.

कांग्रेस के एक नेता कहते हैं, ‘भूपेंद्र हुड्डा को लगता है कि उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा भी रोहतक से एक सीट निकाल सकते हैं. दीपेंद्र दो चुनावों से ये सीट जीतते आए हैं. उन्हें लगता है कि प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के लिए सिरसा से चुनाव जीतना आसान नहीं होगा. वे पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि गठबंधन नहीं होने की स्थिति में हरियाणा की कम से कम दो सीटें निकलेंगी और इनमें एक पर वे खुद और दूसरे पर उनके बेटे रहेंगे. ऐसा करके वे हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं. मकसद यह है कि कुछ ही महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में उनके नेतृत्व को लेकर पार्टी के केंद्रीय नेताओं में बिल्कुल स्पष्टता रहे.’

2004 से लेकर 2014 तक दस साल भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं. मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर संघर्ष चल रहा है. आप के साथ गठबंधन को रोककर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह संकेत दिया है कि अगले विधानसभा चुनावों में वे नेतृत्व हासिल करने की दौड़ से अभी पीछे नहीं हटे हैं.

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