आंध्र प्रदेश में 46 वर्षीय जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत मिलता दिख रहा है.

आंध्र प्रदेश में 46 वर्षीय जगन मोहन रेड्डी का जादू मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोला है. रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत मिलने के साथ उनका मुख्यमंत्री बनना तय है. रेड्डी की पार्टी ने ना सिर्फ विधानसभा बल्कि लोकसभा चुनाव में भी शानदार प्रदर्शन किया है. दिलचस्प ये है कि रेड्डी ने ये चुनाव किसी भी गठबंधन के साथ मिलकर नहीं बल्कि अपने बूते ही लड़ा.

आंध्र प्रदेश से विधानसभा की 175 और लोकसभा की 25 सीटे हैं. रिपोर्ट लिखे जाने तक आंध्र विधानसभा चुनाव में 175 सीटों में से 151 पर वाईएसआर कांग्रेस और 24 पर तेलुगु देशम (टीडीपी) आगे थी. राज्य से 25 लोकसभा सीटों में भी 23 पर वाईएसआर कांग्रेस के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं, सिर्फ 2 सीट पर ही टीडीपी का उम्मीदवार आगे है.

तेलुगु देशम नेता चंद्रबाबू नायडू ने 2014 विधानसभा एनडीए के सहयोगी के रूप में जीता था. उस वक्त उन्हें अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण की पार्टी जनसेना का भी समर्थन हासिल था. लेकिन 2019 तक आते-आते स्थितियां बदल गईं. किसी वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक रहे नायडू 2018 में एनडीए से बाहर आ गए. 2019 में चुनाव से पहले पवन कल्याण की पार्टी जनसेना ने भी अलग रास्ता चुन लिया. लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव, दोनों में पवन कल्याण की पार्टी ने तेलुगु देशम की संभावनाओं को चोट पहुंचाई और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का रास्ता आसान किया.

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वाईएसआर राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन मोहन रेड्डी का मुख्यमंत्री बनने का बड़ा सपना पूरा होने जा रहा है. 2 सितंबर 2009 को हेलीकॉप्टर हादसे में वाईएसआर राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद जगन मोहन रेड्डी को उम्मीद थी कि आंध्र में पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने के लिए उन्हें कमान सौंपी जाएगी. लेकिन कांग्रेस नेतृत्व की ओर से ऐसा नहीं किए जाने पर जगन मोहन रेड्डी ने कांग्रेस से अलग होकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नाम से अपनी आलग पार्टी बनाई.

जगन मोहन रेड्डी के लिए क्या रहा कारगर?

रेड्डी ने आंध्र के लोगों से संपर्क के लिए 341 दिन की पदयात्रा की. 3,648 किलोमीटर की इस पदयात्रा उनके पक्ष में माहौल बनाने में मदद की. इस साल जनवरी में ये पदयात्रा ख़त्म हुई. इस पदयात्रा में उन्होंने वोटरों तक जाकर ‘घर तक सरकार’ और सत्ता के विकेंद्रीकरण जैसे वादे किए.

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी का मुख्य ज़ोर एससी, एसटी और मुस्लिम वोटरों को लुभाने पर रहा. नतीजे बताते हैं कि इन तीनों समुदाय से जगन को भरपूर समर्थन मिला. आंध्र का इतिहास बताता है कि यहां राजनीतिक पदयात्राओं का वोटरों पर खासा असर पड़ता है. 2004 में जगन के पिता वाईएसआर राजशेखर रेड्डी ने ऐसी ही पदयात्रा के दम पर 10 साल पुराने चंद्रबाबू नायडू के शासन को उखाड़ फेंका था और कांग्रेस की राज्य की सत्ता में वापसी कराई थी. 2014 में चंद्रबाबू नायडू ने भी पदयात्रा का रास्ता अपना कर फिर आंध्र प्रदेश की सत्ता में वापसी की.

जगन मोहन रेड्डी ने दिवंगत पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए इस बार अपनी पदयात्रा में आंध्र के 13 ज़िलों को कवर किया और 175 विधानसभा क्षेत्रों में से 136 तक पहुंच कर लोगों से संपर्क किया. इसी पदयात्रा ने जगन के 10 साल पुराने मुख्यमंत्री बनने के सपने को साकार करने में मदद की.

2014 विधानसभा चुनाव में कम अंतर से हार के बाद जगन मोहन रेड्डी ने जानेमाने रणनीतिकार प्रशांत किशोर की इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) को 2019 चुनाव की रणनीति के लिए अपने साथ जोड़ा. जगन के  लिए गढ़ा गया जो काफी प्रभावी रहा- ‘रावाली जगन, कावाली जगन’ (हम जगन को लाएंगे, हमें जगन की ज़रूरत है),

प्रशांत किशोर की रणनीति ने की जगन की राह आसान

IPAC की ओर से जगन के प्रचार के लिए डेढ़ साल पहले काम शुरू किया गया. इसके लिए 20,000 युवकों को जोड़ा गया. इनकी ओर से ही 175 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी प्रचार का 70% हिस्सा संभाला गया. IPAC ग्रुप की ओर से राज्य के करीब 46,000 बूथों पर हर एक के लिए 11-11 सदस्यीय बूथ कमेटियों का गठन किया गया. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के लिए करीब 5 लाख बूथ कार्यकर्ताओं ने काम किया. जगन की पदयात्रा भी IPAC की रणनीति का हिस्सा थी. इससे पहले लोगों में य़े धारणा थी कि जगन मोहन रेड्डी तक आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता. पदयात्रा में लोगों से जगन के संपर्क ने इस धारणा को तोड़ने में बड़ा काम किया.

2014 में नायडू की पार्टी टीडीपी ने 175 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीट पर जीत हासिल की थी वहीं जगन मोहन रेड्डी की पार्टी को 67 सीट पर कामयाबी मिली थी. जहां तक लोकसभा चुनाव का सवाल है तो 2014 में टीडीपी को 15 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 8 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

88 फीसदी साक्षरता वाले आंध्र प्रदेश में 11 अप्रैल को मतदान हुआ. राज्य चुनाव में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें देखने को भी मिलीं. गड़बडी की वजह से कई जगह अधिकारियों को कुछ पोलिंग बूथ पर वोटिंग का वक्त रात 3-4 बजे तक बढ़ाना पड़ा. राज्य में 79.8%  मतदान रिकार्ड हुआ.

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