अयोध्या ज़मीन विवाद में मध्यस्थता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है और मध्यस्थता कमेटी को समाधान के लिए लगभग तीन महीने का वक़्त दे दिया है.

मध्यस्थता कमेटी के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट में पहली बार इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने मामले की सुनवाई की.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता कमेटी की रिपोर्ट मिल गई है. तीन सदस्यीय मध्यस्थता कमेटी ने इस मामले का समाधान निकालने के लिए और वक़्त मांगा है और अदालत ने इसकी मंज़ूरी दे दी है.

मध्यस्थता कमेटी ने उम्मीद जताई कि वो 15 अगस्त तक इस मसले का समाधान ढूंढ लेंगे. पाँच जजों की पीठ ने इस पर सहमति जताते हुए मध्यस्थता कमेटी को 15 अगस्त तक का वक़्त दे दिया.

सुप्रीम कोर्ट (फ़ाइल फोटो)इमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर तीन मध्यस्थ नियुक्त किए थे.

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस फ़क़ीर मोहम्मद इब्राहिम ख़लीफ़ुल्ला (रिटायर्ड) के नेतृत्व में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति का गठन किया था.

इस समिति में श्री श्री रविशंकर और सीनियर एडवोकेट श्रीराम पंचू शामिल हैं.

अदालत ने कहा था कि मध्यस्थता की कार्यवाही पर मीडिया रिपोर्ट नहीं कर सकेगा.

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