अयोध्या – सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का भी गठन होने के बाद से यहां पर श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इस क्रम में सबसे पहला काम रामलला को उनके स्थान से हटाने के रूप में किया जा रहा है, ताकि निर्माण के दौरान रामलला की पूजा-अर्चना और भोग-राग निर्बाध रूप से चलती रहे।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण से पहले उनके अस्थाई मंदिर के निर्माण का फैसला किया गया है, ताकि भक्तगण उनके दर्शन कर सकें। तमाम कानूनी उलझनों की वजह से अब तक रामलला टेंट में विराजमान थे, लेकिन सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया। मंदिर के निर्माण में वक्त लगेगा यही वजह है कि तब तक के लिए मेक शिफ्ट मंदिर में रामलला की प्रतिमा को पूजा-अर्चना और दर्शनों के लिए विराजमान किया जाएगा।

अस्थाई मंदिर का खाका तैयार हो चुका है और गर्भ गृह से करीब 150 मीटर की दूरी पर मानस भवन के करीब मेकशिफ्ट मंदिर बनाया जाएगा। मंदिर पूरी तरह बुलेटप्रूफ हो सकता है और इसे फाइबर से तैयार किया गया है। इसी योजना के तहत विशेषज्ञों ने बुधवार को प्रथम बेला में रामलला के मौजूदा गर्भगृह और सिंहासन की नाप-जोख की। रामलला जिस वैकल्पिक गर्भगृह में विराजमान होंगे, उसे अपेक्षित सुविधा-सहूलियत से लैस करने की भी तैयारी है।

रामलला के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने बताया कि इस वक्त जहां रामलला विराजमान हैं, वह गर्भगृह है, लेकिन मंदिर निर्माण के लिए उस जगह को खाली करना होगा। रामलला को जल्द ही अपने स्थान से करीब 150 मीटर दूर मानस मंदिर के पास ले जाया जाएगा, जहां अस्थाई तौर पर मंदिर बनाया जाएगा और जब तक राम लला का मंदिर बनकर तैयार नहीं होता तब तक उनकी पूजा-अर्चना वहीं होगी। कुछ दिन पहले ही आर्किटेक्ट और इंजीनियरों ने गर्भ गृह के इलाके का दौरा किया था।

रामलला का गर्भगृह फिलहाल 35 गुणे 25 फीट में है और जिस सिंहासन पर चारो भाइयों सहित विराजमान हैं, वह तकरीबन पांच गुणे चार फीट का है। इसी माप के अनुरूप रामलला का वैकल्पिक गर्भगृह बनेगा। वैकल्पिक गर्भगृह अधिग्रहित परिसर में स्थित रामचरितमानसभवन के दक्षिण दिशा में स्थापित किया जाएगा। यह परिसर का वह परिक्षेत्र होगा, जो प्रस्तावित मंदिर के मुख्य ढांचे से विलग होगा, ताकि निर्माण की गतिविधियों के संक्रमण से वैकल्पिक गर्भगृह मुक्त रहे। रामलला जहां ढांचा ध्वंस के बाद 27 वर्ष दो माह 13 दिन से टेंट में विराजमान हैं, वहीं वैकल्पिक गर्भगृह फाइबर का होगा। यहां पर लकड़ी के मौजूदा सिंहासन के विपरीत वैकल्पिक गर्भगृह में रामलला संगमरमर के सिंहासन पर विराजमान होंगे।

रामलला के प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास ने वैकल्पिक गर्भगृह की माप लेने आए विशेषज्ञों से बताया कि रामलला का वर्तमान गर्भगृह जिस आकार का है, वैकल्पिक गर्भगृह कम से कम उसी आकार का बनना चाहिए, ताकि भव्य मंदिर का निर्माण होने तक रामलला की पूजा-अर्चना में कोई दिक्कत न आए। वैकल्पिक गर्भगृह में रामलला का साजो-सामान भी सहेजने की जरूरत होगी।

रामलला की वस्तुओं में पूजन सामग्री, तीन संदूक में रखी उनकी पोशाक और बिछावन, रजाई एवं कंबल है। मौजूदा गर्भगृह के अनुरूप वैकल्पिक गर्भगृह में चारो भाइयों सहित रामलला एवं हनुमानजी का विग्रह स्थापित होगा। हनुमानजी के विग्रह के लिए संगमरमर का चबूतरा भी बनेगा।