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Tuesday, January 28, 2020

आयुर्वेद के उद्धार की कमान संभालेंगे लोक शिक्षक, पायलट प्रोजेक्ट का नोडल सेंटर है बीएचयू का आयुर्वेद संकाय

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आयुर्वेद के ज्ञान से वाकिफ कराते हुए उसके मुताबिक खान-पान और आदतों में बदलाव कर स्वस्थ जीवन जीने का गुर ब्लाक स्तर पर अब लोक शिक्षक सिखाएंगे।

वाराणसी-  आयुर्वेद के ज्ञान से वाकिफ कराते हुए उसके मुताबिक खान-पान और आदतों में बदलाव कर स्वस्थ जीवन जीने का गुर ब्लाक स्तर पर अब लोक शिक्षक सिखाएंगे। इसके लिए बीएचयू का आयुर्वेद संकाय उन्हें प्रशिक्षित करेगा। पाठ्यक्रम तैयार है। सर्टिफिकेट कोर्स के लिए दाखिले की प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होगी।

आयुर्वेद संकाय के डीन प्रो. वाईबी त्रिपाठी के मुताबिक इसके लिए आवेदन शुल्क 300 रुपये है। दाखिला मेरिट व साक्षात्कार के आधार पर होगा। वहीं, छह माह का प्रशिक्षण छात्रों को निश्शुल्क दिया जाएगा। 200 सीटों में से 160 ओपेन व 40 ट्रस्टी नामिनी हैं। वेलनेस सेंटर की तर्ज पर बेंग्लुरु के शंकराचार्य ट्रस्ट ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया है। पहले चरण में प्रशिक्षण के बाद लोक शिक्षकों को चंदौली, बनारस व मीरजापुर में आयुर्वेद को लोकप्रिय बनाने के लिए ब्लाक स्तर पर नियुक्त किया जाएगा। वेतन के रूप में प्रतिमाह 12000 रुपये का भुगतान होगा।
सेहत के लिए ऋतुचर्या जरूरी 
– अनावश्यक कीटनाशकों व खाद का प्रयोग करने से खेतों की सेहत बिगड़ती जा रही है। इसका प्रभाव न सिर्फ पशुओं वरन मनुष्यों की सेहत पर भी पडऩे के कारण बीमारियां भी बढ़  रही हैं। साथ ही अनियमित दिनचर्या व ऋतु के विपरीत खान-पान भी रोग बढ़ा रहे हैं। लोक शिक्षक ग्रामीणों को आयुर्वेद के मुताबिक आहार-विहार अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे और समाज को स्वस्थ बनाएंगे।
ट्रस्ट वहन करेगा खर्च 
– आयुर्वेद संकाय-बीएचयू छात्रों को  प्रशिक्षण देगा। इस दौरान छात्रों के रहन-सहन, प्रशिक्षण व प्लेसमेंट के बाद वेतन आदि पर करीब 1.5 करोड़ रुपये का खर्च होगा, जिसे ट्रस्ट वहन करेगा।
एक वर्ष बाद होगा जमीनी सर्वेक्षण 
– पायलट प्रोजेक्ट के एक वर्ष पूरे होने के बाद बीएचयू के वैज्ञानिकों की टीम गांवों में जाकर मिट्टी, पशु व लोगों के स्वास्थ्य का आकलन करेगी। प्रयोग सफल होने पर स्किल इंडिया के तहत प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा जाएगा।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा 
– लोक शिक्षक किसानों को सामान्य फसल के साथ औषधीय खेती के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इससे औषधियों की कमी दूर होने संग किसानों की आय भी बढ़ेगी। प्रशिक्षण प्राप्त युवा औषधियों के मूल्य निर्धारण संग किसानों को बाजार की उपलब्धता आदि की भी जानकारी देंगे।
बोले अधिकारी 
शंकराचार्य ट्रस्ट के पायलट प्रोजेक्ट के तहत लोक शिक्षक के सर्टिफिकेट कोर्स के लिए अगले सप्ताह से आवेदन लिए जाएंगे। वहीं जनवरी से प्रशिक्षण शुरू कर दिया जाएगा। – प्रो. वाईबी त्रिपाठी, डीन-आयुर्वेद संकाय, बीएचयू।

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