मर्दों के लिए नया ब्लूटूथ कॉन्डम, जो बिस्तर पर उनकी ‘परफॉरमेंस’ नापेगा

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जब गर्भनिरोधक चीज़ों की बात आती है, तो मर्दों के लिए कॉन्डम और औरतों के लिए बर्थ कंट्रोल पिल का नाम आता है. पिछले कुछ दशकों से लोगों के बीच कॉन्डम और दूसरे गर्भ निरोधक उपायों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. भारत में ख़ास तौर पर एक कंज़र्वेटिव सोसायटी होने के कारण लोग इस बारे में बात करने से और अपने बच्चों को इसकी जानकारी देने से झिझकते हैं.

इसका मतलब ये कि कॉन्डम मुख्यतया प्रेगनेंसी रोकने के लिए बनाया गया है. आजकल लेटेक्स का आता है, पहले अलग अलग चीज़ों से बनता था. लेकिन बाज़ार में एक नया प्रोडक्ट आने वाला है जो कॉन्डम है ही नहीं, फिर भी उसे कॉन्डम कहकर बेचा जाएगा.

ब्रिटेन की एक कम्पनी है. उसने I.Con के नाम से एक नया कॉन्डम लांच किया है जो पुरुषों को उनके इंटरकोर्स के बारे में पूरी जानकारी देगा.

मतलब?

जैसे कॉन्डम पहना जाता है, वैसे ही इस रिंग को पहनना होगा. ये फोन से कनेक्ट हो जाएगा ब्लूटूथ के ज़रिए. इसमें नैनो चिप भी है.फिर ये आपके फ़ोन को सारी जानकारी भेजेगा कि आपने कितनी देर तक सेक्स किया. किस पोजीशन में किया. इससे कितनी कैलोरी बर्न हुई. यानी कुल मिलाकर प्रेग्नेसी रोकने के अपने काम के अलावा ये सब कुछ करेगा.

यहीं से बात शुरु होती है हमारी. इसके क्या नुकसान हैं, और क्यों ये औरतों से भी ज्यादा मर्दों के लिए खतरनाक है, पढ़ लीजिए:

  1. ये औरतों की सेफ्टी को नज़रअंदाज़ करता है. इसका इस्तेमाल करने से सेक्सुअली ट्रांस्मिटेड डिज़ीज़ यानी सेक्स से फैलने वाले रोग रोके नहीं जा सकते.
  2. मर्दों को भी इससे कोई फायदा नहीं होगा. अगर वे खुद को सेफ नहीं रखते और सिर्फ ये पीनस रिंग पहन कर सेक्स करते हैं तो उन्हें भी अपनी पार्टनर से कई बीमारियां मिल सकती हैं.
  3. ये मर्दों की इन्सिक्यूरिटी को बढ़ाने के अलावा किसी और काम नहीं आएगा. जिस तरह पितृसत्ता ने औरतों पर प्रेशर डाला है एक सांचे में ढलने का, उसी तरह पितृसत्ता ने मर्दों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है. जगह जगह दीवारों पर नामर्दी के इलाज और लिंग बड़ा करने के विज्ञापन इसी तरह की असुरक्षा की भावना बढ़ाते हैं.
  4. सेक्स कोई एथलेटिक कम्पटीशन नहीं होता. पुरुषों को एक मशीन की तरह बनाकर रख देने वाली ये मशीन ना सिर्फ सेक्स को केवल एक एक्सरसाइज बनाकर रख देती है बल्कि औरतों को भी डीह्यूमनाइज़ करती है. प्रेगनेंसी की चिंता का ध्यान ना रखना तो है ही साथ ही साथ उनके शारीरिक सुख का ध्यान ना रखना एक बहुत आम समस्या है भारत में.
  5. कुछ समय पहले आई एक स्टडी में ये सामने आया था कि अधिकतर महिलाएं ऑर्गेज्म यानी चरम सुख को नहीं पहुंच पातीं. इसकी वजह यही है कि मर्दों को नहीं पता होता कि आखिर सेक्स के समय औरतों को किस चीज़ की सबसे ज्यादा ज़रूरत है. उसके ऊपर से मर्दों के ईगो को संतुष्ट करने के लिए एक और डिवाइस मार्किट में लाकर क्या साबित करने की कोशिश की जा रही है?

सेक्स के मामले में वैसे भी कई चीज़ें औरतों के फेवर में नहीं हैं. मर्दों के भी नहीं हैं लेकिन उनकी तादाद कम है. अपने ही शरीर को लेकर कम्फ़र्टेबल ना हो पाना, सेक्स के पहले फोरप्ले का न होना, सेक्सुअल पार्टनर का उनकी ज़रूरतों को लेकर जागरूक न होना ये सभी दिक्कतें औरतों को झेलनी पड़ती हैं. मर्दों पर भी सेक्स को लेकर इतना बड़ा हौव्वा छाया रहता है कि वो खुद को मर्द साबित करने की कोशिश में कुछ भी करने को तैयार रहते है. औरतों कि मांग नज़रअंदाज़ करनामुश्किल नहीं है, पितृसत्ता हज़ारों सालों से करती आई है. लेकिन मर्दों की असुरक्षा पर खेलन एक प्रॉफिट देने वाला काम है. लगभग हमेशा. इसलिए इस तरह का डिवाइस बनाकर लाने की एक कम्पनी ने सोची. और दिर्फ़ सोची ही नहीं, अखबारों की मानें तो लगभग 9 लाख लोग इसमें रूचि भी दिखा चुके हैं.

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