CDS जनरल रावत का निधन:बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत

नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत से पूरा देश सदमे में है। तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में आज दोपहर भारतीय वायुसेना का वह हेलीकॉप्टर जिसमें जनरल रावत, उनकी पत्नी समेत 14 लोग दुर्घटनाग्रस्त हो गए। नीलगिरी में दुर्घटनाग्रस्त होने के तुरंत बाद एमआई सीरीज के हेलीकॉप्टर ने सुलूर आर्मी बेस से उड़ान भरी। इस हेलीकॉप्टर दुर्घटना से देश ने जनरल बिपिन रावत के रूप में एक बहादुर सैन्य अधिकारी को खो दिया।

जनरल बिपिन रावत से जुड़ी 10 बातें
सीडीएस के रूप में नियुक्त होने से पहले, जनरल बिपिन रावत ने सेनाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। वे सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए, जिसके बाद उन्हें सीडीएस नियुक्त किया गया। जनरल बिपिन रावत की पहचान एक ऐसे अफसर थे, जिन्हें देश से जो जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी लगन और कुशलता से निभाया।
सीडीएस बनने से पहले, बिपिन रावत ने 27 वें सेनाध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। सेना प्रमुख बनाए जाने से पहले, उन्हें 1 सितंबर 2016 को भारतीय सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में नियुक्त किया गया था।
जनरल बिपिन रावत को पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। वर्ष 2015 में म्यांमार में किया गया क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन उन्हीं की देखरेख में चलाया गया था. इस ऑपरेशन में सेना ने एनएससीएन-के के आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया.
जनरल रावत 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक की योजना का भी हिस्सा थे, जिसमें भारतीय सेना एलओसी के पार पीओके तक गई और पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर हवाई हमले किए।
जनरल बिपिन रावत सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कसला के पूर्व छात्र थे। उन्हें दिसंबर 1978 में भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से ग्यारह गोरखा राइफल्स की 5 वीं बटालियन में कमीशन दिया गया था, जहाँ उन्हें ‘स्वॉर्ड ऑफ़ ऑनर’ से सम्मानित किया गया था।
उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों में काम करने का 10 साल का अनुभव था। जनरल रावत को ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों और आतंकवाद विरोधी अभियानों की कमान संभालने का अनुभव था।
बिपिन रावत ने पूर्वी क्षेत्र में एक पैदल सेना बटालियन की कमान संभाली। उन्होंने कश्मीर घाटी में एक राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर और एक पैदल सेना डिवीजन की भी कमान संभाली।
डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज कोर्स के पूर्व छात्र, जनरल बिपिन रावत ने सेना में रहते हुए लगभग चार दशकों तक देश की सेवा की। इस दौरान उन्हें वीरता और विशिष्ट सेवाओं के लिए UISM, AVSM, YSM, SM से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जनरल रावत ने कई लेख लिखे जो विभिन्न पत्रिकाओं और प्रकाशनों में प्रकाशित हुए। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल की उपाधि प्राप्त की।
जनरल रावत ने प्रबंधन और कंप्यूटर अध्ययन में डिप्लोमा प्राप्त किया था। जनरल बिपिन रावत ने सैन्य मीडिया सामरिक अध्ययन पर अपना शोध पूरा किया और 2011 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) से सम्मानित किया गया।

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