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अंफन तूफ़ान से भारत-बांग्लादेश में कम से कम 19 लोगों की मौत

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अंफन तूफ़ान से भारत-बांग्लादेश में कम से कम 19 लोगों की मौत

अत्यंत तीव्र चक्रवाती तूफान अम्फान ने भारत में 12 लोगों की जान ले ली है। कोलकाता और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में तूफान से भारी नुकसान होने की खबरें आ रही हैं। ओडिशा में भी भारी तबाही होने की रिपोर्ट मिल रही हैं। पड़ोसी देश बांग्लादेश में तूफान से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है। वहां भी तूफान से भारी नुकसान हुआ है।

पश्चिम बंगाल के कई हिस्से बुरी तरह प्रभावित

पश्चिम बंगाल में तूफान के कारण सैकड़ों कच्चे और कमजोर मकान बर्बाद हो गए हैं। निचले इलाकों में पानी भरने से भी काफी नुकसान हो रहा है। उत्तरी 24 परगना जिले में पेड़ के नीचे दबने से एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई। हावड़ा में एक 13 वर्षीय लड़की की मौत होने की खबर है। बिजली का करंट लगने से हुगली और उत्तरी 24 परगना में तीन लोग मर गए। हालांकि राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि अभी नुकसान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगा। कई क्षेत्रों से अभी भी रिपोर्ट मिलना बाकी है। वहां से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

पुल और बांध भी क्षतिग्रस्त

चक्रवाती तूफान अम्फान ने बुधवार की शाम पश्चिम बंगाल के बड़े हिस्से में भीषण तांडव मचाया। इससे व्यापक पैमाने पर नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह बहुत बड़ी तबाही है। तूफान कई इलाकों से 130 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरा। अनेक पुल और बांध क्षतिग्रस्त हुए हैं, स्ट्रीट लाइट के खंभे और मोबाइल फोन के टावर गिर गए, पेयजल और बिजली प्रणाली ध्वस्त हो गई है, बड़े इलाके में खेती बर्बाद हो गई है, हजारों कच्चे घर गिर गए हैं और कई इलाकों से संपर्क टूट गया है। हजारों पेड़ गिरने से सड़क पर आना-जाना मुश्किल हो गया है। कोलकाता शहर में 114 किमी तक की रफ्तार से आंधी चली। तीन घंटे में यहां 180 मिमी बारिश हुई। यहां का दमदम हवाई अड्डा गुरुवार सुबह तक के लिए बंद कर दिया गया है। नबान्न भवन, जहां मुख्यमंत्री का भी ऑफिस है, उसे भी नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने राज्य के बड़े हिस्से में गुरुवार तक भारी बारिश की आशंका जताई है। इस दौरान 140 किमी तक की रफ्तार से आंधी भी चलेगी।

नुकसान के आंकलन में समय लगेगा

मुख्यमंत्री ने बताया कि तूफान ने बीच में अपना रास्ता बदला है। पहले इसके दीघा के पास तट पर पहले पहुंचने का अनुमान था, लेकिन यह पहुंचा सागर के पास। उन्होंने बताया कि चक्रवात का आकार काफी बड़ा और हवा की गति काफी ज्यादा होने के कारण राज्य के दक्षिणी इलाके 90 फीसदी तबाह हो चुके हैं। उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मिदनापुर, कोलकाता, हावड़ा, बर्दवान, हुगली, बांकुड़ा, पुरुलिया, नदिया जिलों में ज्यादा नुकसान हुआ है। तूफान के रास्ता बदलने के कारण उत्तरी बंगाल में भी तेज बारिश हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, हमने अपने जीवन में ऐसा तूफान पहले कभी नहीं देखा। अब हम यह देख रहे हैं कि राज्य का कौन सा हिस्सा क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। कुछ इलाकों में राहत टीम को पहुंचने में एक-दो दिन लगेंगे, उसके बाद ही नुकसान का पूरा आकलन किया जा सकेगा। खेती को नुकसान को देखते हुए किसानों को हाथों में कुछ पैसा पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

6.5 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा

पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में सुबह से बारिश हो रही थी। समय बीतने के साथ यहां हवा की गति और बारिश की भीषणता बढ़ती जा रही थी। मौसम विभाग के अनुसार चक्रवाती तूफान का दायरा काफी बड़ा है और इसे पूरी तरह निकलने में अभी समय लगेगा। एडीआरएफ के महानिदेशक एसएन प्रधान के अनुसार पश्चिम बंगाल में पांच लाख और ओडिशा में 1.5 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया गया। ओडिशा में इसकी 20 टीमें तैनात की गई हैं। पश्चिम बंगाल में 19 टीमें तैनात हैं और दो स्टैंडबाय में रखी गई हैं। तूफान 21 मई को असम और मेघालय पहुंचेगा। वहां भी भारी बारिश के आसार हैं।

बांग्लादेश में राहत अधिकारी की भी मौत

बांग्लादेश में चक्रवाती तूफान ने कल शाम 3.30 से 5.30 बजे के बीच तबाही मचाना शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि तूफान से बचाव कार्य में लगे एक अधिकारी की भी मौत हो गई। शाह आलम नाम का अधिकारी उस समय लापता हो गया जब उसकी नाव कालापारा उपजिला की एक नहर में डूब गई। करीब नौ घंटों के बाद उसका शव मिला। बांग्लादेश में करीब दस लाख लोगों को तूफान की तबाही से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था। तूफान की भयावहता को देखते हुए पड़ोसी देश के सभी बंदरगाहों को सर्वोच्च खतरे का संकेत प्रसारित करने को कहा गया था।

पूर्वी भारत और बांगालादेश से टकराए शक्तिशाली तूफ़ान अंफन के कारण अब तक कम से 16 लोगों की मौत हो चुकी है.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार बीते दो दशकों में आने वाला ये सबसे शक्तिशाली तूफ़ान है.

बंगाल की खाड़ी से उठे इस तूफ़ान के कारण भारत के पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पड़ोसी बांग्लादेश में तेज़ हवाएं चली हैं और भारी बारीश हो रही है.

तूफ़ान के कारण तीनों जगहों पर सैंकड़ों पेड़ जड़ से उखड़ गए हैं, हज़ारों घर नष्ट हुए हैं और लाखों लोग इससे प्रभावित हैं. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बीच लोगों निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पश्चिम बगांल में अंफन की वजह से क़रीब 165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएं चलीं और पाँच मीटर तक ऊंची लहरें समुद्र तट से टकराईं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रदेश के दो ज़िले तूफ़ान अंफन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जहां कई इलाक़ों से संपर्क टूट गया है. यहां अब तक 10 लोगों की मौत को चुकी है.

उन्होंने कहा, “अब तक पाँच लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है. तूफ़ान के कारण कई इलाक़ों में भारी तबाही हुई है. मेरा मानना है कि तूफ़ान से होने वाला नुक़सान कोरोना से हो रहे नुक़सान से ज़्यादा होगा.”

प्रदेश में अधिकारियों का कहना है कि नुक़सान का सही आकलन गुरुवार को ही लगाया जा सकेगा.

अंफन तूफ़ानइमेज कॉपीरइटEPA/STR

तूफ़ान से बांग्लादेश बुरी तरह प्रभावित

पड़ोसी बांग्लादेश का कहना है कि तूफ़ान का व्यापक असर सुंदरबन डेल्टा इलाक़े के मैनग्रूव के जंगलों को हुआ है, जहां से अब तक कुछ ज़्यादा जानकारी नहीं मिल पा रही है.

बांग्लादेश के मौसम विभाग के प्रमुख शमसुद्दीन अहमद ने कहा है कि तूफ़ान समुद्र तट पर बसे दक्षिण-पश्चिमी ज़िले सातकिरा में 151 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज़ हवाएं टकराईं.

बांग्लादेश में अधिकारियों ने क़रीब 30 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. हालांकि जानकार चिंता जता रहे हैं कि कोरोना महामारी के बीच जारी राहत और बचाव कार्य में सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है.

अधिकारियों ने अब तक यहां छह लोगों की मौत की पुष्टि की है जिसमें एक पांच साल का बच्चा भी शामिल है. साथ ही राहत काम में जुटे एक व्यक्ति पानी में बह गया है.

फॉर्सेट चीफ़ मोइनुद्दीन ख़ान ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, “यहां तूफ़ान से हुए नुक़सान का अब तक जायज़ा नहीं लगाया जा सका है. हो सकता है कि तूफ़ान के कारण कई जानवर भी पानी में बह गए हों.”

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लगभग हर साल आता है बंगाल का खाड़ी में तूफ़ान

बंगाल की खाड़ी में लगभग हर साल तूफ़ान आते हैं जो आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश को प्रभावित करते हैं.

साल 2007 में सिद्र तूफ़ान के कारण बांग्लादेश 3,500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

साल 1999 में ओडिशा से टकराए सुपर साइक्लोन ने क़रीब दस हज़ार से अधिक लोगों की जान ली थी. इसके आठ साल पहले तूफ़ान, तेज़ हवाओं और बाढ़ के कारण बांग्लादेश में कम से कम 139,000 लोगों की मौत हुई थी.

साल 1970 में तूफ़ान और बाढ़ के कारण कम से कम पाँच लाख लोगों की मौत हुई थी.

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