INDIA की सबसे मशहूर पेंटिंग ‘ग्लो ऑफ़ होप’ में दिखने वाली लड़की गीता उपलेकर की 102 साल की उम्र में मौत

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जगह-जगह बिकने और घर-घर में दिखने वाली ये पेंटिंग जानते हैं किसने बनाई थी?

2 अक्टूबर, गांधी जी का जन्मदिन. 2 अक्टूबर शास्त्री जी का जन्मदिन. 2 अक्टूबर 2018, दिल्ली में किसान रैली. 2 अक्टूबर 2018, गीता उपलेकर की मृत्यु. हैं?

कौन हैं ये गीता उपलेकर?

एक हाथ में मोमबत्ती लिए, दूसरे से लौ को छिपाए, खूबसूरत साड़ी पहने, लौ की रौशनी दिख नहीं रही है लेकिन उससे आलोकित है लड़की का चेहरा, उसकी परछाई पीछे दीवार पर पड़ रही है. कुछ याद आ रहा है. राजा रवि वर्मा के नाम से मशहूर पेंटिंग- ‘ग्लो ऑफ होप’. इस चित्र में जो लड़की है वो गीता उपलेकर ही हैं. असल में ये पेंटिंग राजा रवि वर्मा ने नहीं एस.एल. हलदणकर ने बनाई थी. तसल्ली से जानते हैं गीता और इस पेंटिंग के बारे में. पहले तो आप ये पेंटिंग देखिए-

‘ग्लो ऑफ होप’ में जो लड़की है वो गीता उपलेकर हैं. फोटो क्रेडिट- Twitter‘ग्लो ऑफ होप’ में जो लड़की है वो गीता उपलेकर हैं. फोटो क्रेडिट- Twitter

‘ग्लो ऑफ होप’ ये पेंटिंग बनाई सावलराम लक्ष्मण हलदणकर ने. पेंटिंग ने बहुत नाम कमाया. इतनी खूबसूरत थी ये पेंटिंग कि लोगों को लगा कि ये राजा रवि वर्मा ने बनाई है. उन्हीं के नाम से मशहूर भी हो गई.

इस पेंटिंग के पीछे की कहानी क्या है?

असल में ‘ग्लो ऑफ होप’ में जो लड़की है वो गीता उपलेकर हैं. गीता, हलदणकर साहब की बेटी थीं. 102 साल की उम्र में मंगलवार को उनकी मृत्यु हो गई. बात उनके बचपन की है. साल 1945-46 की. जब वो कुछ 14-15 साल की थीं. दिवाली के दिन वो दिए जला रही थीं. जैसा कि हिन्दू परिवारों में होता है. नई साड़ी पहनी थी. दिवाली में नए कपड़े पहनने का रिवाज़ है. नई साड़ी पहनकर वो अपने पिता को दिखाने गईं. इस समय वो एक दिए को पकड़े हुए थीं और हवा से कहीं उसकी लौ बुझ न जाए इसलिए दूसरे हाथ से उसपर आड़ किए हुए थीं. इस तरह दीपक की लौ उनके चेहरे पर रौशनी कर रही थी. रौशनी से उनका चेहरा और खूबसूरत दिख रहा था. पिता उनको देखकर इतने आनंदित हुए कि उन्होंने गीता की तस्वीर बनाना चाहा.

अब तीन दिनों तक गीता को इस ही तरह उनके लिए पोज़ करना पड़ा. तब जाकर बनी उनकी ये पेंटिंग. इस पेंटिंग को हलदणकर साहब ने वाटर कलर से बनाया था. वो सबको ये बताना चाहते थे कि वो बिना गलती किए पेंटिंग बना सकते हैं. ऑयल कलर से बनाने पर पेंटिंग में सुधार किया जा सकता है. सफेद कलर के इस्तेमाल से आप गलती को सुधार सकते हो. वाटर कलर पेंटिंग में ऐसा नहीं हो पाता. उसमें बड़ा ही ध्यान रखकर आपको पेंटिंग बनानी पड़ती है.

इस पेंटिंग की कीमत 8 करोड़ रुपए तक लगी थी. फोटो क्रेडिट- Twitterइस पेंटिंग की कीमत 8 करोड़ रुपए तक लगी थी. फोटो क्रेडिट- Twitter

सावलराम हलदणकर की मेहनत रंग लाई. उनकी पेंटिंग को बहुत सराहा गया. बड़े-बड़े खरीददार उसे खरीदने के लिए उन्हें मुंह मांगी कीमत देने को तैयार थे. हलदणकर साहब नहीं माने. किसी कीमत पर अपनी तस्वीर को बेचना उन्हें गवारा नहीं गुज़रा. उन्होंने यही कहा कि ये पेंटिंग उनकी बेटी के लिए है. वो इसे नहीं बेचेंगे पर अंत में मैसूर के राजा ने उनके सामने पेशकश रखी और वो मना नहीं कर पाए. 300 रुपए में मैसूर के राजा ने उनसे ग्लो ऑफ होप का चित्र खरीद लिया. बाद में इस ही पेंटिंग की कीमत 8 करोड़ रुपए तक लगी थी.

अब इस पेंटिंग को मैसूर के जगमोहन पैलेस में श्री जयचामा राजेंद्र आर्ट गैलरी में देखा जा सकता है. राजा ने महल को आर्ट गैलरी बनवाया और तस्वीर यहां की हो गई. ‘ग्लो ऑफ होप’ इस पेंटिंग को ‘विमन विथ द लैंप’ भी कहा जाता है. गीता की शादी कृष्णराव उपलेकर से हुई. उनके चार बच्चे हैं. तीन बेटे और एक बेटी.

इंडियन एक्स्प्रेस को दिए इंटरव्यू में गीता बताती हैं- ‘मुझे बहुत बाद में एहसास हुआ कि मेरे पापा महान कला और प्रतिभा के धनी थे. जिस पेंटिंग के लिए मैंने पोज़ किया था वो उनकी सबसे फेमस पेंटिंग में से एक है.’ गीता उपलेकर खुद एक क्लासिकल सिंगर थीं. उनके 7 भाई-बहन थे. सभी भाई-बहन किसी न किसी कला से जुड़े हुए थे. गीता की ही तरह उनके दो भाई शास्त्रीय गायन में पारंगत थे. बाकी सभी भाई-बहन पिता की तरह पेंटर थे.

आज गीता हमारे बीच नहीं हैं मगर उनके पापा उन्हें जीते जी अमर कर गए थे.

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