नहीं रहे महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह, आइंस्टीन के सिद्धांत को दी थी चुनौती

0
25

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर शोक जताते हुए इसे समाज और बिहार के लिए एक बड़ा नुकसान बताया. सिंह करीब 40 साल से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे.

पटना: महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना में निधन हो गया. कहा जाता है कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने आइंस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. 74 वर्षीय वशिष्ठ नारायण लंब समय से सिजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी से पीड़ित थे और काफी दिनों से बीमार चल रहे थे. उनके एक करीबी ने बताया कि फिलहाल पटना में रहने वाले सिंह की आज सुबह तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर तत्काल पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

बिहार के भोजपुर के बसंतपुर के रहने वाले सिंह की तबीयत पिछले महीने भी खराब हुई थी, जिनका इलाज पीएमसीएच में ही कराया गया था, बाद में इन्हें छुट्टी दे दी गई थी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक जताया है और  राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करने का ऐलान किया है.

वहीं खबर ये भी है सरकार वशिष्ठ नारायण सिंह के पार्थिव शरीर के लिए एक अदद एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कर पाई है. उनका परिवार एंबुलेंस के इंतजार में बैठा हुआ है.

कैसा था वशिष्ठ नारायण सिंह का जीवन

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह अपने शैक्षणिक जीवनकाल से ही कुशाग्र रहे थे. डॉ़ सिंह नेतरहाट आवासीय विद्यालय के छात्र थे और सन 1962 उन्होंने दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी. पटना सायंस कॉलेज में पढ़ते हुए उनकी मुलाकात अमेरिका से पटना आए प्रोफेसर कैली से हुई. उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर प्रोफेसर कैली ने उन्हे बर्कली आकर शोध करने का निमंत्रण दिया.

सन 1963 में वे कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में शोध के लिए चले गए. 1969 में उन्होंने कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की. उन्होंने वाशिंगटन में गणित के प्रोफेसर के पद पर काम किया.

अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद कुछ समय के लिए वह भारत आए, मगर जल्द ही अमेरिका वापस चले गए और वॉशिंगटन में गणित के प्रोफेसर के पद पर काम किया. वो 1971 में वह भारत वापस लौट आये. उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और भारतीय सांख्यकीय संस्थान, कलकत्ता में अध्यापन का कार्य किया. वे भूपेन्द्र नारायण मंडल विष्वविद्यालय, मधेपुरा के विजिटिंग प्रोफेसर भी थे. उन्होंने ‘साइकिल वेक्टर स्पेस थ्योरी‘ पर शोध किया था.

स्वास्थ्य मंत्री ने जताया शोक

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शोक जताया है. पांडेय ने कहा कि उनके निधन से ना सिर्फ शिक्षा जगत बल्कि सामाजिक जगत को भी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई मुश्किल है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.

तेजस्वी यादव ने प्रकट की शोक संवेदना

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक संवेदना प्रकट करता हूं. ऐसी महान विभूति को कोटिश: नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि.

एंबुलेंस का इंतजार करता रहा महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन गुरुवार को पटना के पीएमसीएच में हो गया, लेकिन दुनियाभर से चर्चित गणितज्ञों में शुमार किए जाने वाले वशिष्ठ निधन के बाद भी सरकारी उपेक्षा के शिकार बने और काफी देर तक उनका शव एंबुलेंस का इंतजार करता रहा.

  • मौत के बाद सरकारी उपेक्षा के शिकार बने वशिष्ठ
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार निधन पर जता चुके हैं शोक
  • आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को दी थी चुनौती

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन गुरुवार को पटना के पीएमसीएच में हो गया, लेकिन दुनियाभर से चर्चित गणितज्ञों में शुमार किए जाने वाले वशिष्ठ नारायण निधन के बाद भी सरकारी उपेक्षा के शिकार बने और काफी देर तक उनका शव एंबुलेंस का इंतजार करता रहा.

परिजनों के साथ पटना के कुल्हरिया कांप्लेक्स के पास रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह की तबीयत आज सुबह अचानक खराब हो गई. बताया जा रहा है कि आज तड़के उनके मुंह से खून निकलने लगा. जिसके बाद उन्हें तत्काल परिजन पीएमसीएच लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

परिजनों का आरोप है कि वशिष्ठ नारायण सिंह की मृत्यु के 2 घंटे तक उनकी लाश अस्पताल के बाहर पड़ी रही. 2 घंटे के इंतजार के बाद एबुंलेंस उपलब्ध कराया गया.

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे. जब वह पीएमसीएच में भर्ती थे तो उनका हालचाल जानने के लिए नेताओं का तांता लगा रहा. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर केंद्रीय मंत्री तक उन्हें देखने गए थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके निधन पर शोक जता चुके हैं.

सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती

वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. उनके बारे में यह भी मशहूर है कि नासा में अपोलो की लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा ही रहा था.

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने 1969 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की. इसके बाद वह वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. वशिष्ठ नारायण ने नासा में भी काम किया, लेकिन वह 1971 में भारत लौट आए.

नहीं जाने दिया अमेरिका

भारत लौटने के बाद वशिष्ठ नारायण ने आईआईटी कानपुर, आईआईटी बंबई और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की. 1973 में उनकी शादी वंदना रानी से हो गई. शादी के कुछ समय बाद 1974 में उन्हें मानसिक दौरे आने लगे. 1975 में वह मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित हो गए. इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद उनकी पत्नी ने उनसे तलाक ले लिया.

कहा जाता है कि 1976 में इलाज और उनकी सारी जिम्मेदारी लेने को अमेरिका तैयार था, लेकिन परिजनों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें अमेरिका जाने नहीं दिया और राजनीति के तहत 1976 से 1987 तक रांची के मेंटल हास्पिटल में भर्ती कराकर उनकी प्रतीभा को कुचल दिया गया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here