चंबा का अचंभा : चुनते हैं दो सांसद पर जिले का कोई नहीं

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चंबा। संसदीय चुनाव का बिगुल बज गया है। चंबा जिले में भी चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हर बार चंबा जिले के मतदाता दो सांसद चुनते हैं। चुराह, चंबा, डलहौजी व भटियात के मतदाता कांगड़ा ससंदीय क्षेत्र से और भरमौर विधानसभा क्षेत्र के लोग मंडी ससंदीय क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। बावजूद इसके दोनों संसदीय क्षत्रों से चंबा जिले के प्रत्याशी को किसी पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। 48 साल से मतदाता चंबा जिले से सांसद चुने जाने के इंतजार में हैं।

हालांकि 1971 से पहले चंबा का अपना संसदीय क्षेत्र था। 1962 में जब चुनाव हुए तो चतर सिंह चंबा के पहले सांसद बने थे। 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में वीरचंद दूसरे सांसद बने थे, लेकिन 1971 में चंबा जिला कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में आ गया। इसके बाद किसी पार्टी ने चंबा से प्रत्याशी नहीं उतारा है। बार-बार चंबा की अनदेखी से अब लोगों में भी आवाज उठनी शुरू हो गई है कि आखिर चंबा से प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जाता।

कांगड़ा संसदीय सीट से अभी तक किसी भी प्रत्याशी का टिकट फाइनल नहीं है। चंबा जिला से कांग्रेस की पंजाब प्रभारी एवं डलहौजी की विधायक आशा कुमारी के नाम की चर्चा है लेकिन अभी फाइनल नहीं है। ऐसे में देखना रोचक होगा कि 48 से चंबा का सूखा खत्म होता है या फिर चंबा के खाते में निराशा ही आती है।

चाहे विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा, प्रत्याशी का चयन हाईकमान करता है। जीतने वाले उम्मीदवार को ही मैदान में उतारा जाता है। चंबा से अगर टिकट की कोई दावेदारी करता है तो जरूर हाईकमान के पास उनका पक्ष रखा जाएगा। -डीएस ठाकुर, भाजपा जिला अध्यक्ष, चंबा।

प्रत्याशियों का चयन हाई लेवल की कमेटी करती है, अगर किसी ने टिकट के लिए आवेदन किया है तो उसकी पूरी स्क्रीनिंग के बाद चयन होगा। -नीरज नैयर, कांग्रेस जिला अध्यक्ष, चंबा।

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