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Wednesday, February 19, 2020

खानपान से लेकर आयुर्वेद की किताबों तक को ताजगी से भरने वाले इस मसाले की पूरी दुनिया है दीवानी

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खाद्य व पेय पदार्थो का स्वाद बढ़ाने के साथ ही आयुर्वेद की किताबों तक पुदीने की खुशबू ताजगी से भर देती है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इसकी दीवानी है।

पुदीने के हरे पत्ते हमें तब याद आते हैं जब हरी चटनी बनाते वक्त वे नजर ना आ रहे हों और हमें अपना काम धनिया और हरी मिर्च से ही चलाना पड़ रहा हो। हकीकत यह है कि पुदीने के अभाव में हरी चटनी निष्प्राण सी लगती है। विडंबना यह भी है कि खाने को सनसनाती ताजगी से भरने वाला पुदीना अक्सर मसालों में नहीं गिना जाता। इसे ज्यादातर लोग सजावट के लिए ही इस्तेमाल करते हैं।

स्वाद और सुगंध का बेजोड़ नमूना

पुदीना जिसे अंग्रेजी में मिंट कहते हैं मैथा नामक पौधे से प्राप्त होता है जिसकी अनेक प्रजातियां हमारी देश में पाई जाती है। ऐसा नहीं कि लोगों को पुदीने के स्वाद और सुगंध का पता नहीं है। अवध के खाने में पुदीने के ताजे या सूखे पत्तों का इस्तेमाल खुले हाथ से किया जाता रहा है। शामी कबाब की लज्जत इससे बढ़ती है तो बिरयानी और पुलाव में पुदीना महकता है। यही बात हैदराबाद के दस्तरख्वान के बारे में भी कही जा सकती है। केरल में ईसाई समुदाय जो पारंपरिक लैंब रोस्ट बनाता है उसका साथ निभाने के लिए मिंट सॉस ही बनाया जाता है। ऐसा जान पड़ता है कि इस रूप में पुदीने का प्रयोग उन्होंने उन यूरोपीय सौदागरों से सीखा जिनसे उनका संपर्क देश के दूसरे हिस्सों से पहले हुआ था। बाकी बहुत सारे मसाले तो उनके अपने ही प्रांत के थे इसीलिए पुदीना उन्हें आकर्षक लगा।

संकटमोचक पेय की जान

पश्चिम में जहां सूखी वनस्पतियों और बूटियों का महिमामंडन किया जाता है वहां पुदीना तुर्की से लेकर इटली और फ्रांस तक समान रूप से लोकप्रिय है। पुदीने से गर्मी का ताप दूर भगाने वाला शरबत भी बनाए जाता है, जिन्हें तुर्की में जुलाब कहते हैं। इसे मूल फारसी गुलाब का अपभ्रंस माना जाता है। अमेरिका के दक्षिणी प्रांतों में जहां गर्मी ज्यादा पड़ती है, वहां मिंट जुलैप नामक कॉकटेल बनाया जाता है। कद्दकस की गई बर्फ के ऊपर स्थानीय बॉरबोन व्हिस्की उड़ेलकर उसमें पुदीने का सत्व डालकर यह हरा-भरा ताप निवारक संकटमोचक पेय बनाया जाता है। फ्रांस में खाने के बाद कुछ मीठा-हल्का मादक पेय पीने का दस्तूर है। इनमें से एक क्रैम द मेंथ नामक पेय है जो पन्ने जैसा हरे रंग का होता है और खान-पान के शौकीन लोगों के लिए उस रत्न जितना ही मूल्यवान होता है।

आयुर्वेद से रसोई तक फैली महक

आयुर्वेद के अनुसार, पुदीना पाचक और वमन निरोधक गुणों वाला होता है इसीलिए वैद्य हल्के पेट दर्द या अपच के उपचार के लिए पुदीन हरा नामक औषधी देते रहे हैं। यहां प्रसंगवश यह उल्लेख जरूरी है कि एक बार जब उत्तर प्रदेश में शराबबंदी सख्ती से लागू की गई तब कई शराबी पुदीन हरे की छोटी-छोटी शिशियों को ही हलक के नीचे उतार अपनी तलब मिटाते थे। अब बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी प्राकृतिक उपचार के नाम पर पुदीन हरा बाजार में उतार चुके हैं। गले में खराश हो या खांसी उसमें भी पुदीना लाभदायक माना जाता है। खांसी की मीठी गोलियों में पुदीने का तेल अनिवार्यत: रहता है। स्वाद को सुवासित बनाने के लिए कई लोग च्युइंगम खाए जाते हैं जिसके असर की बुनियाद स्पियरमिंट नामक जंगली पुदीने पर ही टिकी रहती है। विदेश में पुदीने का रूतबा देख हमारे देश में भी अब अनेक गृहणियां और पेशेवर सेफ पुदीने को मसाले के रूप में काम लाने लगे हैं। रायता और सलाद में सूखे मसाले और सजावट के साथ-साथ चबाने के लिए भी ताजे पुदीने की पत्तियां नजर आने लगी हैं।

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