कारगिल विजय दिवस के 20 साल: वो तीर्थ जिसके दर्शन आपको जरूर करने चाहिए

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फौजी बताते हैं कि जाड़े के दिन और रात यहां करीब चार से पांच फीट बर्फ जमी रहती है लेकिन रात की गश्त पूरे 365 दिन ऐसी सी चलती रहती है.

श्रीनगर: कारगिल विजय के 20 साल की सीरीज में हम आप तक उन जगहों की रिपोर्टस दिखा रहे हैं, पढ़ा रहे हैं जिन जगहों पर इस युद्ध में अपने अदम्‍य साहस और जांबाजी के दम पर दुश्‍मन के छक्‍के छुड़ाने वाले देश के कई वीर सपूतों की वीरगाथाएं अंकित हैं. इसीलिए हम बार-बार ये कह रहे हैं कि ये आधुनिक भारत के वो तीर्थ हैं जिनके दर्शन आपको जरूर करने चाहिए. हालांकि सुरक्षा कारणों की वजह से आपको यहां तक आने की इजाजत शायद नहीं मिल पाएगी, इसीलिए हमने तय किया कि हम ज़ी मीडिया के कैमरे के जरिये आपको इस तीर्थ के दर्शन जरूर कराएंगे.

इसी सीरीज में आज ज़ी मीडिया की टीम आपको लेकर जा रही है जमीन से करीब 14 हजार फीट की उंचाई पर बने एक पोस्ट पर, द्रास सेक्टर के मुश्को घाटी से होते हुए ये पथरीला, खतरनाक, पहाड़ी रास्ता जिससे होते हुए ज़ी मीडिया की टीम पहुंची भारतीय सेना के जिस पोस्ट पर, उसे सैंडो पोस्ट के नाम से जाता है. सेंडो पोस्ट पर आर्मी के जवानों से बातचीत करते हुए निगाह पड़ी ठीक सामने बर्फ की सफेद चादर से ढकी चोटी, टाइगर हिल पर…जी, वहीं टाइगर हिल जिसका नाम आपने कई बार सुना होगा. मीडिया रिपोर्टस में, टीवी पर, फिल्मों में. ये वही टाइगर हिल है जिस पर 1999 की कारगिल की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान ने भारत के साथ वादा खिलाफी कर, धोखे से इस पर अपना कब्जा जमा लिया था.

युद्द रणनीति के हिसाब से टाइगर हिल का ये पोस्ट बहुत अहम और बहुत आक्रमक पोस्ट था क्योंकि आसपास की पहाड़ की चोटियों में सबसे उंचा होने की वजह से दुश्मन की सेना को यहां से हमारा पूरा द्रास सेक्टर और नेशनल हाइवे 1 अल्फा, साफ-साफ दिखाई देता था और पाकिस्तानी फौज इस प्वाइंट से लगातार हमले करके हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही थी. उनकी मकसद द्रास सेक्टर के रिहायशी और यहां बने मिलिट्री प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाने का था और भारतीय फौज की चुनौती ये थी कि वो सामने से चोटी तक पहुंचने के लिए जब भी एडवांस करने की कोशिश करते थे. चोटी पर बैठा दुश्मन उनको देख लेता था और उन पर शुरू हो जाती थी फायरिंग.

भारतीय सेना ने टाइगर हिल की चोटी पर तिरंगा लहराया
लेकिन दुनिया का इतिहास गवाह है कि भारतीय फौज भी कब कहां हार मानी है. एक नई रणनीति के तहत भारतीय फौज की टुकड़ियों ने टाइगर हिल पर पीछे के एक अल्टरनेट रास्ते से रातो-रात एडवांस करना शुरू कर दिया. हालांकि ऊपर दुश्मन तक पहुंचने का ये रास्ता और ज्यादा कठिन और बर्फ की ज्यादा मोटी परत में ढंका हुआ था, लेकिन भारतीय सेना के जवानों के फौलादी इरादों के सामने इन दुर्गम रास्तों ने भी हार मान ली और आखिरकार भारतीय सेना ने टाइगर हिल की चोटी पर पहुंचकर दुश्मन को वहां से मार भगाया और अपना तिरंगा एक बार फिर शान से वहां लहराया.

Sando post

रात के करीब साढ़े आठ बज चुके थे, सूर्य के अस्त होते ही यहां का तापमान हो चुका था माइनस तीन, यानि जब मैदानी इलाकों में जबरदस्त गर्मी है उस वक्त वहां का तापमान है माइनस तीन तो सर्दियों में क्या हालत होती होगी यहां इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं होगा.

पूरे 365 दिन चलती रहती है रात की गश्त
फौजी बताते हैं कि जाड़े के दिन और रात यहां करीब चार से पांच फीट बर्फ जमी रहती है लेकिन रात की गश्त पूरे 365 दिन ऐसी सी चलती रहती है. जैसे कि आज हो रही है. शाम के ढलते ही भारतीय फौज की टुकड़ियां यहां अपनी नाइट पेट्रोलिंग शुरू कर रही हैं और ये पेट्रोलिंग चलती है रातभर, इन बर्फ से ढकी पहाड़ियों के ऊपर लेकिन न तो इन जवानों के चेहरे पर शिकन है, परेशानी की कोई लकीर और तभी तो हम कहते हैं. हमें गर्व अपनी भारतीय सेना के इन फौलोदी वीरों पर जिनके इन पोस्टस पर होने की वजह से दुश्मन यहां आने का दुस्साहस तो छोड़िए वो आंख उठाकर देखने की हिम्मत भी नहीं कर सकता है.

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