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Thursday, December 12, 2019

Kartik Purnima 2019: कार्तिक पूर्णिमा को जन्मे थे गुरू नानक देव जी,कौन हैं गुरू नानक देव

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Kartik Purnima 2019 कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिन्दुओं और सिखों के लिए महत्वपूर्ण है। सिखों के पहले गुरू नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था।

Kartik Purnima 2019: कार्तिक पूर्णिमा का दिन हिन्दुओं और सिखों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। सिखों के पहले गुरू और सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस दिन सिख समुदाय के लोग प्रकाश पर्व मनाते हैं, गुरुद्वारों को विशेष रोशनी से सजाते हैं, भजन-कीर्तन के साथ लंगर का आयोजन किया जाता है। गुरू नानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारों में मथा टेका जाता है और आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। घरों को भी रोशनी से सजाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा मुहूर्त

इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर दिन मंगलवार को है। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 11 नवंबर दिन सोमवार को शाम 06 बजकर 02 मिनट से हो रहा है, जो 12 नवंबर दिन मंगलवार को शाम 07 बजकर 04 मिनट तक है।

कार्तिक पूर्णिमा को स्नान-दान का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा का हिन्दुओं में भी बड़ा महत्व है। इस दिन नदियों में स्नान करने, पूजा-पाठ के बाद दान करने का विधान है। इस दिन स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का अनन्त फल मिलता है। इसी दिन सायंकाल के समय मत्स्यावतार हुआ था। इस कारण इसमें दिए हुए दानादि का 10 यज्ञों के समान फल मिलता है।

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली

कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी में देव दीपावली मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सभी देवी देवता काशी में उपस्थित होकर दीपावली मनाते हैं। इस कारण से काशी के सभी घाट और मंदिर दीपकों के प्रकाश से जगमग होते हैं। इस दिन गंगा मैया और भगवान शिव की पूजा का भी विधान है। स्नान आदि के बाद गंगा पूजा कर दीप दान किया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा को भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था, इस वजह से देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों और मनुष्यों को उनके अत्याचार से मुक्ति मिली थी। इससे खुश होकर सभी देवी देवता उस दिन काशी आए थे और त्रिपुरासुर वध की खुशी में दीपावली मनाई थी। तब से ही काशी में हर वर्ष देव दीपावली मनाई जाती है।

कार्तिक पूर्णिमा को ग्रह शांति के लिए दान

कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि आप इस दिन ग्रहों को शांत करना चाहते हैं तो आपको इस प्रकार दान करना चाहिए। सूर्य के लिए गुड़ और गेंहू, चंद्रमा के लिए जल, मिसरी या दूध, मंगल के लिए मसूर की दाल, बुध के लिए हरी सब्जियां और आंवला, बृहस्पति के लिए केला, मक्का और चने की दाल, शुक्र के लिए घी, मक्खन और सफेद तिल, शनि के लिए काले तिल और सरसों का तेल तथा राहु के लिए सात तरह के अनाज, काले कम्बल और जूते चप्पल का दान करना चाहिए।

Guru Nanak Jayanti 2019 कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष गुरू नानक देव जी की जयंती 12 नवंबर दिन मंगलवार को है।

Guru Nanak Jayanti 2019: सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरू नानक देव जी की जयंती पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष गुरू नानक देव जी की जयंती 12 नवंबर दिन मंगलवार को है। गुरू नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था। बाद में तलवंडी का नाम ननकाना साहब पड़ा, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। आइए गुरू नानक देव जी की जयंती पर हम जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी प्रमुख बातों के बारे में।

1. गुरू नानक देव जी के पिता का नाम कल्यानचंद या मेहता कालू जी था, वहीं माता का नाम तृप्ता देवी था। नानक देव जी की एक बहन थीं, जिनका नाम नानकी था।

2. नानक देव जी बचपन से ही धीर-गंभीर स्वभाव के थे। उन्होंने बाल्यकाल से ही रूढ़िवादी सोच का विरोध किया।

3. एक बार उनके पिता जी ने उनको 20 रुपये देकर बाजार भेजा और बोले ​कि खरा सौदा लेकर आना। उन्होंने उन रुपयों से भूखे साधुओं को भोजन करा दिया। लौटकर उन्होंने पिता जी से कहा कि वे खरा सौदा कर आए हैं।

4. गुरु नानक देव जी की पत्नी का नाम सुलक्षिनी था, वह बटाला की रहने वाली थीं। उनके दो बेटे थे, एक बेटे का नाम श्रीचंद और दूसरे बेटे का नाम लक्ष्मीदास था।

5. नानक देव जी ने सिख धर्म की स्थापना की थी, वे सिखों के प्रथम गुरू हैं। वे अंधविश्वास और आडंबरों के सख्त विरोधी थे।

6. नानक देव जी एक दार्शनिक, समाज सुधारक, कवि, गृ​हस्थ, योगी और देशभक्त थे।

7. नानक जी जात-पात के खिलाफ थे। उन्होंने समाज से इस बुराई को खत्म करने के लिए लंगर की शुरुआत की। इसमें अमीर-गरीब, छोटे-बड़े और सभी जाति के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं।

8. नानक देव जी ने ‘निर्गुण उपासना’ का प्रचार प्रसार किया। वे मूर्ति पूजा के खिलाफ थे। उनका कहना था कि ईश्वर एक है, वह सर्वशक्तिमान है, वही सत्य है।

9. नानक देव जी ने समाज को जागरूक करने के लिए काफी यात्राएं की। उन्होंने हरिद्वार, अयोध्या, प्रयाग, काशी, गया, पटना, असम, बीकानेर, पुष्कर तीर्थ, दिल्ली, पानीपत, कुरुक्षेत्र, जगन्नाथपुरी, रामेश्वर, सोमनाथ, द्वारका, नर्मदातट, मुल्तान, लाहौर आदि स्थानों का भ्रमण किया।

10. गुरू नानक देव जी का देहावसान करतारपुर में 1539 में हुआ। स्वर्गगमन से पूर्व उन्होंने बाबा लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। वे गुरू अंगददेव के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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