वाराणसी- काशी महाकाल एक्‍सप्रेस ट्रेन में अब पेंट्रीकार में शिव परिवार को स्‍थापित किया गया है। ट्रेन में छोटा मंदिर बरकरार रहेगा और मंदिर में ट्रेन से जुड़े कर्मचारियाें की देख रेख में पूजा पाठ का कार्य नियमित रूप से किया जाता रहेगा। पूर्व में काशी महाकाल एक्‍सप्रेस ट्रेन में शिव मंदिर को लेकर उस समय विवाद शुरू हो गया था जब असद ओवैसी ने पीएमओ को मेंशन करते हुए सोशल मीडिया में इस बाबत संविधान के एक पन्‍ने को शेयर किया था। शिवरात्रि के मौके पर शुरु की गई इस ट्रेन में पहले दिन लगभग सभी सीटें भरी हुई गईं।

16 फरवरी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ाव से ट्रेन को वीडियो कांफ्रेंसिंग से कैंट स्‍टेशन पर मौजूद काशी म‍हाकाल एक्‍सप्रेस को हरी झंडी दी थी। पहली बार ट्रेन में कोच संख्‍या पांच की सीट नंबर 64 को भगवान शिव के परिवार के लिए रिजर्व कर उनकी पूजा करने की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। इसके बाद आइआरसीटीसी ने इस बाबत स्‍पष्‍टीकरण भी दिया था कि यह पहली बार ट्रेन की रवानगी के दौरान मंगलकामना के लिए पूजन के लिए बर्थ को मंदिर का रुप दिया गया था। ट्रेन में मंदिर की यह अस्‍थाई व्‍यवस्‍था थी। हालांकि सोशल मीडिया में मंदिर और इसकी पूजा को लेकर विवाद होने के बाद मंदिर को हटाकर अब पैंट्री कार में रख दिया गया है। अब पेंट्रीकार में मंदिर का स्‍थाई तौर पर पूजन और अनुष्‍ठान किया जाएगा।

अपने पहले आधिकारिक दौरे पर ट्रेन की पेंट्रीकार में बाबा विश्‍वनाथ का गौरा और श्रीगणेश के साथ पूरे परिवार की तस्‍वीरें मौजूद रहीं। कर्मचारियों के अनुसार बाबा दरबार की ट्रेन में मौजूदगी बनी रहेगी। इस दौरान बाबा दरबार की कर्मचारियों ने पूजा की और उनको नमन करने के बाद ही ट्रेन में अपनी दिनचर्या की शुरुआत की। इस दौरान बाबा को नमन करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि बाबा का साथ रहने से ट्रेन की यात्रा सुखद और मंगलमय रहेगी।

आधिकारिक नहीं मंदिर

रेल कर्मचारियों के अनुसार ट्रेन में मंदिर का कोई अधिकारिक निर्णय नहीं है। पेंट्री कार में उन्ही कर्मचारियों ने मंदिर को शिफ्ट किया जिन्होंने उद्घाटन के दिन बी-5 में अस्थायी रूप से बर्थ संख्या-64 पर पूजा अर्चना की थी।वहीं बुकिंग के अभाव में वाराणसी से ट्रेन की बोगी संख्‍या पांच में बर्थ संख्या-64 खाली ही गया।

काशी- महाकाल एक्सप्रेस में बर्थ संख्या-64 को नहीं मिले यात्री

काशी- महाकाल एक्सप्रेस के बी-5 बोगी में कथित तौर पर रिजर्व 64 नंबर बर्थ को यात्री नहीं मिले। बुकिंग के अभाव में यह बर्थ अपने पहले व्यवसायिक रन में कैंट स्टेशन से खाली ही गया। वहीं ट्रेन के उद्घाटन के दिन इसी बर्थ पर अस्थायी रूप से स्थापित मंदिर को लेकर काफी विवाद उपजा था। बाद में जिसे ट्रेन के पेंट्रीकार में शिफ्ट कर दिया गया। आईआरसीटीसी के अधिकारियों का दावा है कॉरपोरेट ट्रेन भगवान के नाम पर बर्थ रिजर्व करने जैसी कोई योजना नहीं थी।