एमजे अकबर के इस्तीफ़े की ना 72 घंटे में हां में कैसे बदली,बताया मुहिम की जीत

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#MeToo अभियान में यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहे केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अक़बर ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

वामदलों ने यौन शोषण के आरोपों में घिरे विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर के मंत्रिपरिषद से इस्तीफे को महिलाओं के शोषण के खिलाफ सोशल मीडिया पर शुरु की गयी ‘मी टू’ मुहिम की कामयाबी बताया.

एमजे अक़बर पर मीडिया में काम करने वाली कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. अकबर पर जब ये आरोप लगाए गए, तब वो नाइजीरिया के दौरे पर थे.

अकबर के विदेश दौरे पर रहने के दौरान ये कयास लगाए जा रहे थे कि भारत लौटकर वो इस्तीफ़ा देंगे. लेकिन रविवार को भारत लौटे अकबर अलग तेवर में नज़र आए. अकबर ने इस्तीफ़ा देने की बजाय आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ सोमवार को आपराधिक मानहानि का मुकदमा कर दिया.

अकबर समेत सरकार की तरफ से इस मसले पर अब तक ख़ामोशी बरती गई थी. हालांकि मुकदमे और बयान में अकबर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था.

लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोग सरकार पर अकबर से इस्तीफ़ा लेने का दबाव बना रहे थे. बुधवार शाम को अकबर ने एक बयान जारी कर इस्तीफ़ा दे दिया.

ऐसे में सवाल ये है कि इस्तीफ़ा देने से बचते नज़र आने वाले अकबर ने कैसे 72 घंटे के भीतर इस्तीफ़ा दे दिया?

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अकबर के वो 72 घंटे…

बीजेपी के सूत्रों ने बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद को बताया कि, भारतीय जनता पार्टी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध नज़र आती है. पार्टी लोगों के बीच ऐसी छवि पेश करती है, जिसमें महिलाओं के हक में ठोस कदम उठाए जाने की बात की जाती है.

पार्टी की ओर से बताया गया कि मोदी सरकार की ओर से कभी भी किसी गलत काम का समर्थन नहीं किया गया है. चूंकि ये मामला कोर्ट में है तो अकबर के निर्दोष साबित होने तक ये कदम ज़रूरी था.

सूत्रों का दावा है कि चूंकि अकबर ने मानहानि का केस निजी स्तर पर किया है और सरकार नहीं चाहती कि वो किसी पक्ष की तरह इसमें दिखे, इसलिए इस्तीफ़े का रास्ता चुना गया.

माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इस मसले पर अकबर के ख़िलाफ़ है. आरएसएस का कहना था कि अकबर को इस मामले में इस्तीफ़ा देना चाहिए.

इसी क्रम में मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एमजे अकबर से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक डोभाल ने अकबर को इस्तीफा देने के लिए मनाया था.

इससे पहले, 11 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने #MeToo अभियान का समर्थन किया था.

दत्तात्रेय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर फ़ेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास की पोस्ट शेयर करते हुए अपना समर्थन ज़ाहिर किया.

दास ने अपने पोस्ट में कहा था, “आपको किसी पीड़ित महिला पत्रकार का समर्थन करने के लिए मी टू अभियान की आवश्यकता नहीं है. न आपको महिला होने की आवश्यकता है. आपको महज सही और गलत को समझने की आवश्यकता है. संवेदनशील होने की ज़रूरत है.”

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अकबर ने इससे पहले अपने बचाव में क्या कहा था?

एमजे अकबर के वकीलों का कहना था कि आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी ने खुद माना है कि 20 साल पुराने इस मामले में अकबर ने उनके साथ कुछ नहीं किया था. प्रिया ने अकबर पर आरोप लगाने वाले लेख से पहले कभी कहीं किसी अथॉरिटी के पास शिकायत नहीं की. अकबर के ख़िलाफ़ जिस कथित घटना को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वो सिर्फ़ इस लेख पर आधारित हैं. ये लेख प्रिया की कल्पनाओं पर आधारित है.

एमजे अकबर की ओर से ये कहा गया कि झूठे आरोप लगाकर राजनीतिक बिरादरी, मीडिया, दोस्तों, परिवार और समाज में उनकी छवि को नुकसान हुआ है. इन आरोपों के बाद अकबर को दोस्तों, परिवार, राजनीति और मीडिया से काफ़ी फ़ोन किए गए. इन फ़ोन कॉल्स में झूठे आरोपों को लेकर सवाल किए गए. इन आरोपों से अकबर की छवि को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती.

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क्या बोली थीं महिला मंत्री

स्मृति ईरानी ने कहा था, ”मैं इतना ही कह सकती हूं कि इस मामले में जिन पर आरोप लगे हैं इसका उत्तर वही दे सकते हैं.”

स्मृति ईरानी ने कहा था, “मुझे खुशी है कि मीडिया उनके साथ काम करने वाली महिला कर्मचारियों से इस बारे में सवाल कर रही है लेकिन मुझे लगता है कि जिन पर आरोप लगे हैं उन्हें बयान जारी कर इस मामले में सफ़ाई देनी चाहिए. मैं इसका उत्तर देने के लिए सही व्यक्ति नहीं हूं क्योंकि मैं वहां मौजूद नहीं थी.”

एक टीवी चैनल से बात करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने #MeToo अभियान का समर्थन किया था. हालांकि उन्होंने एमजे अकबर पर कोई टिप्पणी नहीं दी.

उन्होंने कहा था, “मैं उन महिलाओं का समर्थन करती हूं जो अपने अनुभव साझा कर रही हैं. ये महिलाएं बुरे दौर से गुज़री होंगी और सामने आने के लिए काफ़ी हिम्मत चाहिए.”

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने #MeToo को लेकर एक ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा था कि जिस तरह इस अभियान के तहत महिलाओं के मामले मीडिया में सामने आ रहे हैं, उसे देखकर बहुत बुरा लग रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस में उमा भारती की प्रतिक्रिया छपी थी, जिसमें उन्होंने कहा था, “#MeToo एक अच्छा अभियान है. इससे आने वाले समय में कार्यस्थल पर बदलाव ज़रूर आएगा. पुरुष औरतों के साथ ग़लत व्यवहार करने की हिम्मत नहीं करेंगे. औरतें बिना डर के काम कर पाएंगी और अगर कोई उनके लड़की होने की वजह से उनका उत्पीड़न करने की कोशिश करेगा तो वो शांत नहीं बैठेंगी. पुरुषों को अब सतर्क रहना होगा.”

वामदलों ने यौन शोषण के आरोपों में घिरे विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर के मंत्रिपरिषद से इस्तीफे को महिलाओं के शोषण के खिलाफ सोशल मीडिया पर शुरु की गयी ‘मी टू’ मुहिम की कामयाबी बताया.

भाकपा के महासचिव सुधाकर रेड्डी ने बुधवार को अकबर के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा, मुझे लगता है कि जिस तरह से ‘मी टू’ मुहिम देश में जोर पकड़ रही है, उसे देख कर मोदी सरकार अकबर से इस्तीफा लेने पर मजबूर हुयी है. रेड्डी ने इसे मी टू मुहिम की कामयाबी बताते हुये कहा कि अकबर को उसी दिन त्यागपत्र दे देना चाहिये था जब उनकी पूर्व महिला सहयोगियों ने उनके खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाये थे.

माकपा की महिला इकाई की महासचिव मरियम धावले ने कहा कि अकबर का इस्तीफा उन सभी महिला संगठनों की जीत है जिन्होंने महिला पत्रकारों द्वारा केन्द्रीय मंत्री के खिलाफ आरोप लगने के बाद उन्हें मंत्रिपरिषद से हटाने के लिये आंदोलन तेज किया था. उन्होंने कहा कि इस मामले में महिलाओं के आंदोलन की वजह से मोदी सरकार ने मजबूर होकर अकबर से इस्तीफा देने को कहा है.

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