कांग्रेस और वामपंथियों की लोकप्रियता हिंदुस्तान से ज्यादा पाकिस्तान में है-अरुण जेटली

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर देश के हर आदमी के मन में काफी सवाल है। जैसे इनमें कुछ सवाल ऐसे भी है- क्या एक बार फिर मोदी सरकार या अब विपक्ष की बारी आने वाली है?, तीन दशक बाद भारतीय इतिहास में जो बहुमत आया था क्या वह फिर से होगा या फिर गठबंधन में छोटे और क्षेत्रीय दलों का बोलबाला होगा? और गठबंधन भारतीय राजनीति में मजबूरी बनने वाला है या फिर ऐसा विकल्प जिसमें हर क्षेत्र के विकास का रास्ता खुले लेकिन दबाव न हो?

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है और वही विपक्ष की ओर से भी भाजपा की हार का दावा ठोका जा रहा है। तो ऐसे में लोकसभा चुनाव को लेकर खड़े हो रहे सवालों पर भाजपा के शीर्ष नेता व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जवाब दिया है। जेटली ने कहा कि देश में माहौल मोदी के पक्ष में है। जनता नेतृत्व को देख रही है और विपक्ष में न तो चेहरा है और न ही नीयत। उन्होंने यह भी कहा, ‘यह सबल नेतृत्व और अराजकता के बीच का चुनाव है और हम बहुमत से आएंगे।’

दैनिक जागरण के वरिष्ठ कार्यकारी संपादक प्रशांत मिश्र और राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से बातचीत की। प्रस्तुत है उनके साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश…

इस एजेंडे में हमेशा धार रही है। यह देश राष्ट्रवादी देश रहा है। 1971 में जब लड़ाई हुई थी तो क्या पूरा देश इंदिरा जी पीछे नहीं खड़ा था? कारगिल युद्ध के समय क्या पूरा देश वाजपेयी जी के साथ नहीं खड़ा था? यह पहला उदाहरण है कि कांग्रेस और वामपंथी देश को बांटने का काम कर रहे हैं और देश में उनके प्रति घृणा है। वे पाकिस्तानी अखबारों में लीड स्टोरी बन रहे हैं। उनकी लोकप्रियता पाकिस्तान में अधिक और हिंदुस्तान में कम है।

यह सवाल आप मिलिट्री स्ट्रैटजी की जानकारी के बगैर पूछ रहे हैं। ओसामा को अमेरिका ने मारा और फिर कहां दफनाया, समुद्र में कहां फेंका, क्या इसके बारे में आपको या किसी को कोई जानकारी है? यह देश के हित और फौज के खिलाफ है कि ऑपरेशन की जानकारी मांगी जाए। दुनिया में आजतक कभी ऐसे ऑपरेशन का सुबूत नहीं दिया गया। यह राष्ट्रविरोधी सोच है कि सुबूत मांगे जाएं।

सर्जिकल स्ट्राइक की भी कितनी जानकारी आपको है? क्या आपको पता है कि उसे किसने लीड किया। कितने बैचेज गए, कितने कैंप तबाह किए, कितने आतंकी मारे गए, इसकी कोई ठोस जानकारी किसी को दी गई क्या? यह नहीं दिया जाता है और देशहित में न ही कभी मांगा जाता है। यह कांग्रेस का उठाया हुआ विवाद है और बाद में ले. जर्नल हुडा साहब को अपने डिफेंस सिक्योरिटी का एडवाइजर बना लिया जो उस समय नार्दर्न कमांड के ले. जनरल थे। हां, यह जरूर है कि जनरल हुडा को शामिल कर कांग्रेस ने देर से ही सही यह मान लिया कि सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी। वरना वह तो इस पर भी सवाल उठा रही थी।

एयरस्ट्राइक में हमारे कितने जहाज गए, कहां-कहां से गए, क्या हुआ, यह सब मिलिट्री स्ट्रैटजी है। और फिर जब एयरफोर्स चीफ ने कह दिया कि वायुसेना ने टारगेट हिट किया तो उसे भी मानने से इन्कार कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सिर्फ दो ताकतें एयरफोर्स पर सवाल उठा रही हैं। एक पाकिस्तान और एक कांग्रेस।

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