Mission 2019: नजदीकी मुकाबलों में मात देने के महारथी थे ‘मित्र’

0
9

अयोध्या। अगर मित्रसेन यादव को नजदीकी मुकाबलों का बादशाह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने दो बार अपने प्रतिद्वंद्वियों को नजदीकी मुकाबले में शिकस्त देकर इस तथ्य पर मुहर लगा रखी है। पहली बार उन्होंने निर्मल खत्री को शिकस्त देकर संसद का रास्ता तय किया तो दूसरी बार विनय कटियार को परास्त कर लोकसभा की ड्योढ़ी लांघी।

तीन बार फैजाबाद क्षेत्र से लोकसभा में नुमाइंदगी करने वाले मित्रसेन यादव को विपक्ष की राजनीति का महारथी कहा जाता था तो इसके पीछे उनकी जीवट की संघर्ष क्षमता थी। पहली बार 1984 में लोकसभा चुनाव लड़े यादव को भले ही मुंह की खानी पड़ी, लेकिन उन्होंने 1989 में कांग्रेस उम्मीदवार एवं तत्कालीन सांसद निर्मल खत्री को कड़े मुकाबले में पांच हजार 855 मतों से शिकस्त दे दी। निर्मल खत्री के एक लाख 85 हजार 172 वोटों के मुकाबले यादव एक लाख 91 हजार 27 वोट हासिल करने में कामयाब रहे थे। उनकी विजय के साथ फैजाबाद संसदीय क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को पहली बार लोकसभा में नुमाइंदगी का मौका मिला था।

इस क्षेत्र का दूसरा सबसे नजदीकी मुकाबला हुआ 1998 में। फैजाबाद से लगातार दो बार जीत दर्ज कर भाजपा के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार हैट्रिक लगाने के मुहाने पर खड़े थे, लेकिन सात हजार 735 वोटों से जीत दर्ज कर मित्रसेन यादव ने उनका विजयरथ रोक दिया। कटियार के दो लाख 45 हजार 594 मतों के मुकाबले मित्रसेन यादव को दो लाख 53 हजार 331 मत मिले। यही दो मुकाबले ऐसे रहे, जब चुनाव परिणाम का अंतर दस हजार मतों से नीचे का रहा।

1962 में भी हुआ था नजदीकी मुकाबला
जहां तक नजदीकी मुकाबले का सवाल है, इस क्षेत्र में 1962 में भी कांटे की टक्कर हुई थी। कांग्रेस के बृजवासीलाल को भारतीय जनसंघ के राजेंद्र बहादुर सिंह ने कड़ी चुनौती पेश की। बृजवासी लाल महज 10 हजार 852 मतों से ही जीत सके। बृजवासीलाल को 75 हजार 939 मत मिले थे तो राजेंद्र बहादुर को 65 हजार 87 वोट से संतोष करना पड़ा था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here