कांग्रेस को 11 सीटें देकर लालू ने बता दिया है कौन बड़ा भाई

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पटना।  महागठबंधन में महीने भर के महामंथन के बाद आखिरकार सीट बंटवारे के मसले को सुलझा लिया गया है। कांग्रेस के हिस्से में 11 सीटें डालकर राजद ने अपने कुनबे में 29 सीटें रख ली हैं। इसमें हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम), रालोसपा, विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के बीच बंटवारा होगा। इस तरह लालू प्रसाद ने महागठबंधन में कांग्रेस को अकेला खड़ा कर दिया और बाकी घटक दलों को बता-जता दिया है कि राजद की कृपा से ही उन्हें सीटें मिलने जा रही हैं।

कांग्रेस को देकर बाकी बची 29 सीटों में अब बंटवारा होना है। रालोसपा को चार सीटें दी जा रही हैं। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को तीन सीटें मिली हैं। विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के हिस्से में भी दो सीटें आई हैं। शरद यादव को लालटेन लेकर उतरने के लिए अभी भी समझाया-बुझाया जा रहा है।

राजद का दावा है कि वह मान भी गए हैं। इसी आधार पर उनके खेमे के अधिकतम एक प्रत्याशी को समायोजित किया जा सकता है। इसमें अर्जुन राय या उदय नारायण चौधरी का नाम हो सकता है, जिन्हें लालटेन थामना पड़ेगा। इस तरह राजद के खाते में 19 से 21 सीटें आ सकती हैं।

कांग्रेस की हिस्सेदारी तय करने के बाद कुछ सीटों पर जिच अभी भी बरकरार है। मांझी और कुशवाहा की सीटें चिह्नित कर दी गई हैं। हालांकि राजद कुनबे में अंतिम तौर पर सीटों की संख्या का निर्धारण और पहचान अगले एक-दो दिनों में हो सकता है। शनिवार को रांची में लालू प्रसाद से बात-मुलाकात पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा।

बातचीत से बाहर हैं वामदल

राजद की ओर से वामदलों को भी बातचीत का सशर्त न्योता देने का दावा किया जा रहा है, किंतु बदले हालात में अभी उनतक संदेशा नहीं पहुंचा है। माले के साथ तो लालू गठबंधन के पक्षधर हैं, लेकिन भाकपा-माकपा के आधार को खारिज कर रहे हैं। लालू का संदेश लेकर राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह नौ मार्च को माले से बात करने गए थे और आरा की एक सीट का ऑफर भी दिया था। माले का दावा है कि बिहार में वाममोर्चा की एकता के मद्देनजर राजद के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। उसके बाद दोबारा बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया।

पप्पू की नहीं बनी बात 

राजद-कांग्रेस के बीच सबसे बड़ा पेच मधेपुरा और दरभंगा को लेकर था। कांग्र्रेस मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव को सहारा देने पर अड़ी हुई थी, जबकि तेजस्वी यादव का स्टैंड उल्टा था। आखिरकार तेजस्वी की जीत हुई। पप्पू की नाव मंझधार में फंस गई।

मधेपुरा से शरद यादव प्रत्याशी होंगे। इसी तरह दरभंगा की तस्वीर भी साफ नहीं हुई है। कीर्ति झा आजाद को मिलेगा या मुकेश सहनी को, अभी तक पता नहीं है। दोनों बड़े दलों में विमर्श का दौर जारी है। कांग्र्रेस का दावा ज्यादा मजबूत है। सहनी को खगडिय़ा शिफ्ट करने की बात चल रही है। मुजफ्फरपुर भी सहनी के हिस्से में ही जाती दिख रही है।

कल हो सकती है घोषणा

घटक दलों ने दावा किया है कि सबकुछ तय कर लिया गया है। हिस्से की सीटों का खुलासा रविवार को प्रेस कान्फ्रेंस के माध्यम से कर दिया जाएगा। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब सबकुछ सही होने का दावा किया जा रहा है। इसके पहले भी तारीख पर तारीख दी जा चुकी है।

दिल्ली-पटना-रांची में कई दौर की बैठकों और घटक दलों के शीर्ष नेताओं के तौर-तरीके को देखते हुए माना जा रहा है कि अबकी सबकुछ सही रास्ते पर है और खुलासा भी कर दिया जाएगा। इसकी वजह है कि महज दो दिन बाद ही 18 मार्च से पर्चे दाखिल किए जाने हैं। समय कम है। इसलिए अब ज्यादा टालमटोल महागठबंधन के प्रत्याशियों पर भारी पड़ सकता है।

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