Home विदेश कालापानी में स्थायी रूप से 160 सैनिकों की टुकड़ी तैनात करेगा नेपाल, छावनी भी बनाएगा

कालापानी में स्थायी रूप से 160 सैनिकों की टुकड़ी तैनात करेगा नेपाल, छावनी भी बनाएगा

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कालापानी में स्थायी रूप से 160 सैनिकों की टुकड़ी तैनात करेगा नेपाल, छावनी भी बनाएगा
गर्बाधार-लिपुलेख सड़क को अतिक्रमण बताने वाला नेपाल अब कालापानी क्षेत्र के छांगरु में स्थायी रूप से 160 सैनिकों की टुकड़ी तैनात करेगा।

हल्द्वानी: गर्बाधार-लिपुलेख सड़क को अतिक्रमण बताने वाला नेपाल अब कालापानी क्षेत्र के छांगरु में स्थायी रूप से 160 सैनिकों की टुकड़ी तैनात करेगा। अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 12 किमी दूर छावनी का निर्माण भी होगा। इसके लिए गुरुवार शाम गृह मंत्री के रक्षा सलाहकार इंद्रजीत राई कालापानी क्षेत्र में बनी नेपाली सशस्त्र बल की अस्थायी बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) में डटे रहे।

जमीन का सर्वे कर नक्शा तैयार 

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नेपाल कालापानी क्षेत्र में तैनात सैनिकों के लिए बेहतर व्यवस्था करने में जुटा है। इसी क्रम में उसने स्थायी छावनी निर्माण की योजना तैयार की है। जमीन का सर्वे गुरुवार को पूरा कर नक्शा तैयार कर लिया गया। नेपाल कैबिनेट से अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। फिलहाल अघोषित रूप से काम शुरू भी कर दिया गया है।

चार दिन में ही नक्शा तैयार 

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को दिल्ली से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से चीन सीमा तक बनी गर्बाधार-लिपुलेख सड़क का उद्घाटन किया। इसी के बाद से नेपाल ने विरोध शुरू कर दिया। नौ मई को इंद्रजीत राई कालापानी के विवादित क्षेत्र में सेना के हेलीकॉप्टर से पहुंच गए। तेजी दिखाते हुए 13 मई को बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) भी खोल दी गई। 14 को टीम ने छांगरु पहुंचकर स्थायी छावनी के नक्शे पर काम शुरू कर दिया।

नौ करोड़ आएगी लागत 

स्थायी छावनी में अभी करीब 160 सैनिकों की तैनाती की योजना है। इनके लिए कमरों के साथ ही ड्रिल क्षेत्र और आयुद्ध केंद्र का निर्माण होगा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार निर्माण के लिए अभी करीब नौ करोड़ नेपाली रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। बाद में इसकी लागत 15 करोड़ तक बढ़ सकती है। इसके बनने के बाद नेपाली सेना पूरे साल यानि 12 महीने उच्च हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय रह सकती है।

राष्ट्रीयता की भावना भुनाने की जुगत 

नेपाली मीडिया ने गर्बाधार-लिपुलेख सड़क निर्माण के बहाने राष्ट्रीयता की भावना भुनाने का अभियान शुरू किया है। ऑनलाइन खबर डॉट कॉम के साथ ही कांतिपुर और हिमालयन पोस्ट ने भारत पर प्रभावी कार्रवाई का जिक्र करते हुए सैन्य छावनी निर्माण का महिमामंडन किया है।

छांगरु में सैन्य छावनी निर्माण की जानकारी नहीं : एसपी 

एसपी टुंडू, डिप्टी सेनानी 11वीं वाहिनी- एसएसबी डीडीहाट ने बताया कि छांगरु में नेपाल सशस्त्र बल की बीओपी खुल रही है। बस चौकी के लिए भूमि की नापजोख की गई है। छांगरु में सैन्य छावनी निर्माण की जानकारी नहीं है।  

क्‍या कहते हैं भारत-नेपाल संबंधों के जानकार

भारत-नेपाल संबंधों के जानकार रिटायर्ड मेजर बीएस रौतेला ने इस मामले को लेकर कहा कि नेपाल का उद्देश्य गर्बाधार-लिपुलेख मार्ग की निगरानी है। हालांकि, इससे हमारी तैयारी प्रभावित होने वाली नहीं। नेपाल मित्र राष्ट्र है, लेकिन उसकी हाल की गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।

नेपाल बन रहा चीन का मोहरा 

गर्बाधार-लिपुलेख मार्ग को लेकर नेपाल के विरोध और कालापानी क्षेत्र में उसकी सक्रियता को रक्षा विशेषज्ञ व लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) मोहन चंद्र भंडारी गंभीर मानते हैं। उनका कहना है कि नेपाल चीन के मोहरे के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। दरअसल चीन कभी नहीं चाहता था कि देश से लगती उसकी सीमा के मध्य बिंदु (उत्तराखंड से लगती सीमा) पर भारत की स्थिति मजबूत हो। वह इस मामले में सीधे कुछ नहीं कर पा रहा तो नेपाल को आगे करके सीमा विवाद को तूल दे रहा है।

सेना प्रमुख का चीन की ओर इशारा, लिपुलेख में सड़क निर्माण पर नेपाल की आपत्ति के पीछे कोई ताकत

सेना प्रमुख का चीन की ओर इशारा, लिपुलेख में सड़क निर्माण पर नेपाल की आपत्ति के पीछे कोई ताकत
चीन की ओर इशारा करते हुए सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने ने है कहा कि नेपाल ने लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली सड़क निर्माण के मामले में किसी और के कहने पर आपत्ति जताई थी।

नई दिल्‍ली, पीटीआइ। चीन की बढ़ती दखलंदाजियों की ओर इशारा करते हुए सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने (Army Chief Gen MM Naravane) ने शुक्रवार को कहा कि इस बात को मानने की पर्याप्‍त कारण थे कि नेपाल ने उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली सड़क निर्माण के मामले में किसी और के इशारे पर आपत्ति जताई थी। उन्‍होंने चीनी सैनिकों के साथ झड़पों पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि सेना केस बाई केस (a case-by-case basis) के आधार पर चीन की सेना के साथ ऐसी घटनाओं को सुलझा रही है।

एक रक्षा थिंक टैंक के साथ बातचीत में जनरल नरवाने ने कहा कि भारत को उत्‍तरी और पश्चिमी सीमाओं पर दो मोर्चों के लिहाज से सतर्क रहना होगा। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि मौजूदा वक्‍त में किसी टकराव की संभावना नहीं दिखाई देती है। ड्यूटी ऑफ टूर (ToD) की अवधारणा के तहत तीन साल के युवाओं को सेना में शामिल करने के प्रस्ताव पर आर्मी चीफ ने बताया कि ऐसा विचार स्कूल और कॉलेज के छात्रों की उस प्रतिक्रिया के बाद सामने आया कि वे सेना में एक स्थायी कैरियर का चयन किए बिना ही एक सैनिक जीवन का एक्‍सपीरियंस लेना चाहते हैं।

कैलास मानसरोवर तक की यात्रा को बेहतर बनाने के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में चीन-नेपाल बॉर्डर के पास लिपुलेख दर्रे से पांच किलोमीटर पहले तक सड़क निर्माण पर नेपाल की आपत्ति पर सेना प्रमुख ने हैरानी जताते हुए इसके पीछे चीन की ओर इशारा किया। उन्‍होंने कहा कि संभावना है कि नेपाल ऐसा किसी और के कहने पर कर रहा है। सेना प्रमुख ने कहा कि मुझे इस मसले पर कोई विवाद नहीं नजर आता है। नेपाल के राजदूत ने भी कहा है कि काली नदी के ईस्ट साइड का एरिया उनका है लेकिन हम तो नदी के पश्चिम की तरफ सड़क बना रहे हैं। इस क्षेत्र में तो किसी भी तरह का विवाद नहीं है।

सेना प्रमुख ने कहा कि कोरोना संकट के कारण सेना को सरकार की ओर से मौजूदा वित्त वर्ष के लिए खर्च में 20 फीसद की कटौती करने का आदेश मिला है। सेना अपनी तैयारियों से बिना समझौता किए यानी कौशल और युद्ध क्षमता से बिना समझौता किए ही इस पर अमल कर रही है। ड्यूटी ऑफ टूर (ToD) से भी सेना के खर्चों में कटौती करने में मदद मिलेगी। मनोहर पार्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (Manohar Parrikar Institute for Defence Studies and Analyses) के ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि सैन्‍य खर्चों में कटौती के लिए आर्मी की टुकड़ियों के मूवमेंट में कमी लाई जाएगी।

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