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Monday, August 3, 2020

आखिर कैसे संभव होगा जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख के बीच संसाधनों का बंटवारा

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अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख में संसाधनों का भी बंटवारा होगा। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी होने के बाद 90 दिन का समय तय किया गया है।

जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने का बिल पास हो जाने के बाद अब इस तरह के सवाल उठ रहे हैं कि अभी इसको पूरी तरह से काम करने में कितना समय लगेगा। लोकसभा और राज्यसभा में बिल पास हो जाने के बाद अब इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होंगे और सरकारी गजट नोटिफिकेशन के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। गजट नोटिफिकेशन के साथ ही जम्मू कश्मीर विधान परिषद को भंग कर दिया जाएगा, इसी के साथ ये समाप्त हो जाएगी। विधान परिषद के माध्यम से जो भी बिल पेंडिंग पड़े थे वो सभी खत्म हो जाएंगे।

नोटिफिकेशन जारी होने के 90 दिन में एक या इससे ज्यादा एडवाइजरी कमेटी बनाई जाएगी। ये कमेटी दोनों राज्यों के बीच बिजली, पानी की सप्लाई से जुड़े विभाजन पर फैसला लेगी। कमेटी निगमों की संपत्ति और इन दोनों जगहों पर मौजूदा क्या-क्या चीजें लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में जाएंगी इसे भी सुनिश्चित करेगी। जिससे दोनों राज्यों में संतुलन बराबर बना रहे। इस बिल के कुल 58 पन्ने हैं, इन सभी को पढ़ने के बाद अभी ये तय करना बाकी है कि इन दोनों केंद्र शासित राज्यों में फंड का बंटवारा किस-किस आधार पर होगा। इसी के साथ इनकी राजधानी पर फैसला होना बाकी है। आइए देखते हैं अभी जम्मू और लद्दाख में क्या-क्या चीजें बंटनी है।

जम्मू- कश्मीर- 

कश्मीर और जम्मू डिवीजन विधान के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे, यहां दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी। जम्मू में 10 जिले हैं। इनके नाम जम्मू, सांबा, रामबन, कठुआ, उधमपुर, डोडा, पुंछ, राजौरी, रियासी, और किश्तवाड़ हैं। जम्मू के पुंछ हवेली, बाग, सुधान्ती, मुजफ्फराबाद, हट्टियां, भिम्बर, कोटली, मीरपुर और हवेली जिले पाकिस्तान के कब्जे में हैं। जम्मू का क्षे‍त्रफल पीर पंजाल की पहाड़ी रेंज में खत्म हो जाता है। इसी पहाड़ी के दूसरी ओर कश्मीर स्थित है। इसके 10 जिले श्रीनगर, बारामूला, शोपियां, गन्दरबल, बांडीपुरा, बड़गाम, कुलगाम, पुलवामा, अनंतनाग, कूपवाड़ा हैं।

धर्म समुदाय के लोग 

यहां सुन्नी, शिया, बहावी, अहमदिया मुसलमानों के साथ हिन्दू धर्म के लोग रहते हैं। इसके अलावा अधिकतर गुर्जर, राजपूत और ब्राह्मण रहते हैं। आतंकवाद का प्रभाव कश्मीर घाटी के कश्मीरी बोलने वाले सुन्नी मुसलमानों तक ही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर (लद्दाख को मिलाकर) की जनसंख्या 1 करोड़ 25 लाख 41 हजार 302 है। अब लद्दाख के अलग होने के बाद अब जम्मू-कश्मीर की जनसंख्या 1 करोड़ 22 लाख 67 हजार 13 हो जाएगी।

सीमा में नहीं होगा परिवर्तन 

लद्दाख के पास 1 लोकसभा सीट है। दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों के जिलों की जो सीमाएं अभी तक हैं, उनमें कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। अब जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश को 5 लोकसभा सीटें दी गई हैं, लद्दाख के पास एक लोकसभा सीट रहेगी।

नहीं होगी अलग-अलग हाईकोर्ट

इन दोनों जगहों पर अलग-अलग कोर्ट नहीं होगी। एक ही हाईकोर्ट होगी। दोनों केंद्रशासित राज्यों में अलग से हाईकोर्ट नहीं बनेगा। बल्कि मौजूदा जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट को ही दोनों का साझा हाईकोर्ट बनाया जाएगा। यहीं पर साझा जज दोनों राज्यों से जुड़े मामलों को सुनेंगे और फैसला सुनाएंगे। हाईकोर्ट पर होने वाले खर्चा और वहां पर रखे जाने वाले स्टाफ की सैलरी को दोनों जगह की जनसंख्या के आधार पर बांटा जाएगा।

संपत्ति का विभाजन 

संपत्तियों का विभाजन कमेटी करेगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच संपत्ति का विभाजन केंद्र द्वारा बनाई जाने वाली कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। सरकारी नोटिफिकेशन जारी होने के एक साल के अंदर विभाजन का काम पूरा कर लिया जाएगा।

रेवेन्यू का क्या होगा

रेवेन्यू के मामले में 14 वां वित्त आयोग मदद करेगा। दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के बीच रेवेन्यू का बंटवारा उनकी जनसंख्या, वहां मौजूद संसाधन और अन्य जरूरी मानकों के आधार पर होगा। 14 वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 15वां वित्त आयोग दोनों राज्यों की व्यवस्था को बनाएगा।

कैसे होगी पुलिसिंग की व्यवस्था

कारगिल की पुलिस लद्दाख जाएगी, दोनों प्रदेशों में अधिकारियों और कर्मचारियों की तरह ही यथास्थिति के आधार पर पुलिस फोर्स बांटी जाएगी। करगिल और लेह जिले की पुलिस लद्दाख में चली जाएगी। बाकी जिलों की पुलिस जम्मू-कश्मीर का हिस्सा होगी। वो वहां पर बाकी चीजों पर नियंत्रण रखेगी।

बिजली-पानी और अन्य संसाधनों की व्यवस्था 

जब केंद्र सरकार इन दोनों प्रदेशों को केंद्र शासित बनाने का नोटिफिकेशन जारी कर देगी उसके 90 दिन में एक या इससे ज्यादा एडवाइजरी कमेटी बना दी जाएगी। ये कमेटी ही दोनों राज्यों के बीच बिजली, पानी की सप्लाई से जुड़े विभाजन पर फैसला लेगी। कमेटी निगमों की संपत्ति और मौजूदा कंपनियों में से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या जाएगा, इसे भी सुनिश्चित करेगी।

सरकारी-अधिकारी कर्मचारी

फिलहाल इन जगहों पर काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारी पहले जैसे स्थिति में काम करते रहेंगे। जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे सभी प्रशासनिक अधिकारी और स्टेट कैडर से जुड़े आईएएस, आईपीएस और आईएफएस यथास्थिति के आधार अगले आदेश तक मौजूदा जगह पर ही काम करते रहेंगे। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का गठन होने के बाद वहां की सरकार अपने प्रशासन का गठन करेगी।

प्रशासनिक बदलाव-

दोनों केंद्र शासित राज्यों में फंड का बंटवारा आबादी और अन्य मानकों के आधार पर होगा।

लेह होगी लद्दाख की राजधानी 

बंटवारे के बाद लद्दाख की राजधानी लेह होगी। हालांकि, जम्मू-कश्मीर में राजधानी को लेकर अभी अंतिम फैसला बाकी है। आज के समय में जम्मू-कश्मीर में 6-6 महीने के लिए जम्मू और श्रीनगर को राजधानी माना जाता है।

उप-राज्यपाल होंगे मालिक

फिलहाल इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के मालिक उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक ही होंगे। राष्ट्रपति की ओर से अगली व्यवस्था होने तक वह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल वो ही रहेंगे। इसकी घोषणा अभी राष्ट्रपति की ओर से की जाएगी।

दोनों केंद्रशासित प्रदेशों का खर्च

इन दोनों केंद्रशासित प्रदेशों को स्पेशल फंड मिल सकता है, अभी तक जम्मू-कश्मीर को 14वें वित्त आयोग की सिफारिश पर जो फंड मिले हैं, उनका बंटवारा दोनों प्रदेशों में आबादी और अन्य मानकों के आधार पर होगा। केंद्र सरकार बाद में लद्दाख के लिए अलग से ग्रांट और स्पेशल डेवलपमेंट पैकेज का ऐलान कर सकती है।

कौन से मॉडल पर होगा काम 

लद्दाख में चंडीगढ़ जैसे नियम लागू होंगे। नगर निकायों का गठन किया जाएगा। देश में अब कुल 9 केंद्र शासित प्रदेश हो जाएंगे। 7 प्रदेशों में से 5 में विधानसभा की व्यवस्था नहीं है। अब लद्दाख का मॉडल चंडीगढ़ जैसा होगा, जहां विधानसभा नहीं है। लद्दाख के प्रशासक अपने क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नगर निकायों का गठन करेंगे।

लद्दाख की आबादी 

लद्दाख एक ऊंचा पठार है जिसका अधिकतर हिस्सा 3,500 मीटर (9,800 फुट) से ऊंचा है। यह हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रृंखला और सिन्धु नदी की ऊपरी घाटी में फैला है। लद्दाख क्षेत्र की आबादी लेह और करगिल जिलों के बीच आधे हिस्से में बंटी हुई है। कारगिल की कुल जनसंख्या में 76.87 प्रतिशत आबादी मुस्लिम (ज्यादातर शिया) है जबकि लेह में 66.40 प्रतिशत बौद्ध हैं।

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