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डंडा खाने के लिए पीठ मज़बूत कर रहा हूँ- पीएम मोदी

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डंडा खाने के लिए पीठ मज़बूत कर रहा हूँ- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को लोकसभा में डेढ़ घंटे से अधिक समय तक बोले. इस भाषण में उन्होंने सरकार का बचाव किया. साथ ही विपक्ष पर ज़ोरदार हमला भी बोला.

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने धन्यवाद भाषण में सबसे विवादास्पद मुद्दे यानी सीएए पर वे सबसे अंत में बोले.

उन्होंने कांग्रेस, राहुल गांधी और नेहरू पर सवाल उठाए. विपक्ष की टोका-टाकी और शोरगुल के बीच उन्होंने अपना भाषण जारी रखा.

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उनके भाषण की ख़ास बातें यहाँ पढें लेकिन उससे पहले एक दिलचस्प कहानी पीएम ने विपक्ष की खिल्ली उड़ाने के लिए सुनाई.

उनकी कहानी का संक्षिप्त रूप कुछ इस तरह है: ‘एक रेलगाड़ी में कई लोग सफ़र कर रहे थे. जब रेलगाड़ी की रफ़्तार बढ़ी तो एक यात्री ने कहा कि रेल की पटरियां कह रही हैं- प्रभु की किरपा से बेड़ा पार, दूसरे ने कहा आवाज़ तो आ रही है कि प्रभु की माया अपरंपार. एक मुसलमान भी थे. उन्होंने कहा कि मुझे तो अल्लाह तेरी रहमत, अल्लाह तेरी रहमत सुनाई दे रहा है. एक पहलवान जी भी थे, उनकी बारी आई तो उन्होंने कहा, मुझे तो कुछ और ही सुनाई दे रहा है. लोगों ने पूछा कि क्या सुनाई दे रहा है, तो उन्होंने कहा- रेल कह रही है, खा रबड़ी, कर कसरत, खा रबड़ी, कर कसरत.’

पीएम मोदी के इस लतीफ़े पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहकहे लगाए जिसके बाद मोदी ने कहा कि जिसका दिमाग जैसा रहता है उसे वैसी बात समझ में आती है.

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डंडे खाने की तैयारी

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के एक नेता कह रहे हैं कि “छह महीने में लोग मुझे डंडे मारेंगे. अच्छा हुआ, पहले बता दिया. मैं तैयारी कर लूँगा. सूर्य नमस्कार की संख्या बढ़ा दूंगा. लोग मुझे ऐसी-ऐसी गालियां दे रहे हैं कि मैं गाली-प्रूफ़ हो गया हूँ.”

मोदी ने शशि थरूर को संबोधित करते हुए कहा, “संविधान बचाने की बातें बार-बार हुई हैं. मैं भी मानता हूँ. कांग्रेस को यह बात दिन में सौ बार कहनी चाहिए. यह उसके लिए ज़रूरी है क्योंकि संविधान के साथ कब, क्या हुआ, ये सब जानते हैं. ये बोलने से आपको अपनी ग़लतियों का एहसास होगा. न्यायपालिका से न्यायिक समीक्षा का अधिकार छीनने वालों को संविधान की बात बोलनी पड़ेगी. संविधान की बात बोले बिना कोई चारा नहीं है. जिन्होंने दर्जनों बार चुनी हुई सरकारों को बर्ख़ास्त कर दिया हो, उनको संविधान की बात करनी ही चाहिए. संविधान बचाने की शिक्षा लेना बहुत ज़रूरी है.”

इसके बाद उन्होंने पिछली यूपीए सरकार और सोनिया गांधी पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा “पीएम और पीएमओ के ऊपर नेशनल एडवाइज़री काउंसिल थी. रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाने वालों को संविधान का महत्व समझना ज़रूरी है. देश देख रहा है, दिल्ली देख रही है, क्या-क्या हो रहा संविधान के नाम पर. सब देख रहे हैं. देश की चुप्पी रंग लाएगी. वामपंथी और कांग्रेसी, वोट बैंक की राजनीति करने वाले वहां जा-जाकर लोगों को भड़का रहे हैं.” पीएम ने शाहीन बाग़ का नाम लिए बग़ैर शशि थरूर के वहाँ जाने की बात याद दिलाई.

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मोदी ने कहा, “कांग्रेस के समय में संविधान की क्या स्थिति थी, लोगों के अधिकारों की स्थिति क्या थी, ये मैं इनसे पूछना चाहता हूँ. अगर संविधान इतना महत्वपूर्ण है तो जम्मू-कश्मीर में लागू करने से किसने रोका था? आप तो जम्मू-कश्मीर के दामाद रहे हैं शशि जी, आप तो सोचते.”

इसके बाद पीएम ने एक शेर सुनाया, जिसे उन्होंने एक छोटी सी पर्ची पर लिख रखा था. उन्होंने पढ़ा, “ख़ूब परदा है कि चिलमन से लगे बैठे हैं, साफ़ छुपते भी नहीं, सामने आते भी नहीं.”

‘क्या नेहरू सांप्रदायिक थे?’

मोदी बोले कि ‘कश्मीर के बारे में लोगों ने कहा कि 370 हटाने के बाद आग लग जाएगी, भला कैसे-कैसे भविष्यवक्ता हैं!’

इसके बाद पीएम मोदी ने एक-एक करके कई नेताओं के बयानों का हवाला दिया.

उन्होंने कहा, “महबूबा मुफ़्ती ने पाँच अगस्त को कहा था कि भारत ने कश्मीर के साथ धोखा किया. हमने जिस देश के साथ रहने का फ़ैसला किया था, उसने हमें धोखा दिया है. ऐसा लगता है कि हमने 1947 में गलत चुनाव कर लिया था. क्या ये संविधान को मानने वाले लोग इस प्रकार की भाषा को स्वीकार कर सकते हैं?”

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“उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि 370 को हटाने से ऐसा भूकंप आएगा कि कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा. फ़ारूक़ अब्दुल्ला जी ने कहा कि 370 को हटाए जाने से कश्मीर की आज़ादी का रास्ता साफ़ होगा. अगर 370 हटाया गया तो भारत का झंडा लहराने के लिए कश्मीर में कोई नहीं बचेगा. क्या भारत का संविधान मानने वाला ऐसी बात स्वीकार कर सकता है क्या?”

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सीएए को लेकर ‘काल्पनिक भय’ पैदा करने में पूरी शक्ति लगा दी है.

मोदी ने व्यंग्य करते हुए कहा, “वही जो देश के टुकड़े-टुकड़े कराने वालों के साथ फ़ोटो खिंचवाते हैं, पाकिस्तान यही भाषा दशकों से बोलता रहा है. पाकिस्तान ने भारत के मुसलमानों को भड़काने के लिए हर खेल किया. हर रंग दिखाया. पाकिस्तान की बात बढ़ नहीं पा रही जिनको हिंदुस्तान की जनता ने सत्ता के सिंहासन से उतार दिया है, वे लोग ऐसा काम कर रहे हैं जो हम सोच भी नहीं सकते.”

नेहरू पर तंज़ करते हुए मोदी ने कहा, “पीएम बनने की उम्मीद कोई भी कर सकता है. उसमें कोई बुराई नहीं. किसी को पीएम बनना था इसलिए देश के ऊपर एक लकीर खींच दी गई, बँटवारे के बाद अल्पसंख्यकों के ऊपर जो ज़ुल्म हुआ उसकी कल्पना नहीं की जा सकती.”

मोदी ने भूपेंद्र कुमार दत्त और जोगेंद्र नाथ मंडल का ज़िक्र किया. ये दोनों लोग भारत से पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन बाद में लौट आए और भारत में ही उनका निधन हुआ.

पीएम मोदी ने इन दोनों लोगों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर कितने अत्याचार हुए थे. उन्होंने कहा कि ‘ये पाकिस्तान के शुरुआती दिनों की बात थी.’

मोदी ने पाकिस्तान के रवैये का ज़िक्र करते हुए ननकाना साहब पर हुए पथराव की घटना का भी ज़िक्र किया.

इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि ‘क्या नेहरू सांप्रदायिक थे जो उन्होंने पाकिस्तान के केवल अल्पसंख्यकों की बात की, पूरी जनता की नहीं की?’

मोदी ने नेहरू-लियाक़त पैक्ट का भी ज़िक्र किया. इतना ही नहीं, उन्होंने नेहरू की एक चिट्ठी का ज़िक्र किया जो उन्होंने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोर्दोलोई को लिखी थी.

मोदी ने कहा कि इस चिट्टी में लिखा था, “आपको हिंदू शरणार्थियों और मुसलमान माइग्रेंट के बीच फर्क़ करना होगा. इन शरणार्थियों की ज़िम्मेदारी लेनी ही होगी.”

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‘विपक्ष रचनात्मक राजनीति करे’

उन्होंने संसद में 5 नवंबर 1950 को नेहरू के एक बयान का भी ज़िक्र किया जिसमें नेहरू ने मोदी के मुताबिक़ ये कहा था कि “जो प्रभावित लोग भारत में सेटल होने के लिए आए हैं वो नागरिकता मिलने के हक़दार हैं. अगर क़ानून इसके अनुकूल नहीं है तो उसमें बदलाव किया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि “यह गांधी की ही नहीं, नेहरू की भी भावना रही थी. इतने दस्तावेज हैं, रिपोर्टें हैं, जो ये सारी बातें मैंने बताईं. तो क्या पंडित नेहरू सांप्रदायिक थे, क्या पंडित नेहरू हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते थे, कांग्रेस की दिक्कत है कि वह बातें बनाती है, झूठे वादे करती है, दशकों तक उन वादों को टालती है.”

अपने भाषण के शुरुआती हिस्से में उन्होंने किसानों की, विकास की, अर्थव्यवस्था की और रोज़गार की चर्चा की.

उन्होंने कहा कि सरकार तेज़ गति से फ़ैसले ले रही है. उन्होंने ये भी कहा कि उनकी सरकार लीक पर चलने वाली सरकार नहीं है बल्कि नई लकीर खींचने वाली सरकार है.

मोदी बोले, ‘हम चुनौतियों से घबराते नहीं बल्कि उनसे निबटते हैं.’

अपने लंबे भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि ‘विपक्ष को रचनात्मक राजनीति करते हुए देश के विकास के संकल्प को मिल-जुलकर आगे बढ़ाना चाहिए.’

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