क्या प्रियंका का पर्दे के पीछे रहना कांग्रेस की रणनीति है

0
25

11 दिसंबर को जैसे-जैसे चुनाव के फ़ैसले आते गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जय-जयकार बढ़ती ही जा रही थी लेकिन एक चेहरा जो हमेशा राहुल के इर्द गिर्द दिखता था वो इस चुनावी मौसम में एक दम नहीं दिखा.

वो चेहरा था राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी का.

वो प्रियंका गांधी जिन्होंने राहुल गांधी की पहली चुनावी रैली में अपने भाई को बाकायदा आगे बढ़ाया था.

अगर तस्वीरों पर नज़र डालें तो सबसे ज़्यादा वो तस्वीरें उभरती हैं जिसमें लोगों के बीच में राहुल और प्रियंका बैठे हैं और राहुल ने प्रियंका के कंधे पर हाथ रखा हुआ है.

तो कहां गई प्रियंका गांधी? क्या कांग्रेस के राजनीतिक पटल से प्रियंका एकदम गायब हो चुकी हैं?

प्रियंका गांधीइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

कहां गई प्रियंका गांधी

इस चुनावी मौसम राहुल गांधी की रैलियां या बयान काफ़ी चर्चा में रहे. प्रधानमंत्री मोदी पर उनके आरोपों ने काफ़ी सुर्खियां बटोरी लेकिन राहुल गांधी को आगे बढ़ाती प्रियंका न किसी रैली में दिखीं न ही ख़बरों में.

और तो और ये पहला चुनावी मौसम था जिसमें प्रियंका गांधी की चर्चा भी नहीं की गई.

गुजरात चुनाव के दौरान जहां राहुल गांधी के नए रूप को बार बार देखा गया, वहां प्रियंका की सक्रियता भी दिखती थी.

कांग्रेस अधिवेशन में मंच पर भले ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला था लेकिन मंच के पीछे का इंतजाम प्रियंका गांधी ने ही अपने जिम्मे लिया था.

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक प्रियंका ने एक अच्छे प्रशासक की तरह छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा था. एक तरफ वो मच्छरों से निजात पाने के लिए स्प्रे कराती हुई नज़र आई थीं तो साथ ही पर्दे के पीछे से वॉकी-टॉकी लेकर इंतज़ाम में तालमेल बनाती नज़र आईं थी.

इतना ही नहीं, प्रियंका ने ही मंच पर बोलने वाले वक्ताओं की सूची को अंतिम रूप दिया और पहली बार युवा और अनुभवी वक्ताओं का एक मिश्रण दिया. यहां तक कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी समेत क़रीब-क़रीब सभी के भाषण के ‘फैक्ट चेक’ का जिम्मा भी लिया.

लेकिन उस दौरान भी प्रियंका ने ये पूरा ध्यान रखा कि उनकी तस्वीर सामने न आए ताकि लोगों का पूरा ध्यान कांग्रेस अधिवेशन और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर ही रहे.

प्रियंका गांधीइमेज कॉपीरइटPTI

अभी भी सक्रिय भूमिका में हैं प्रियंका

और आज भी प्रियंका इसी भूमिका में हैं. चुनाव जीतने के बाद जब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न आया कि ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ तो प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी और मां के साथ विचार मंथन में शामिल हुई. और बताया जा रहा है कि उनकी सहमति के बाद ही मुख्यमंत्री के नामों की घोषणा हुई है.

कांग्रेस सूत्रों की माने तो राजस्थान में अशोक गहलोत प्रियंका गांधी की पहली पसंद थे. इसी वजह से सचिन पायलट को अपने कदम पीछे लेने पड़े और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी से संतुष्ट होना पड़ा.

कारण बताया गया कि प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के ख़िलाफ़ राजस्थान में ज़मीन घोटाले को लेकर बीजेपी की सरकार ने कई मामले दर्ज करवाए थे. वाड्रा का नाम ज़मीन घोटाले में अशोक गहलोत के ही शासनकाल में आया था. इसलिए प्रियंका चाहती थीं कि अशोक गहलोत ही प्रदेश के मुख्यमंत्री बने क्योंकि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी है.

वैसे भी प्रियंका का मानना है कि 2019 में अनुभव ही ज़्यादा सीटें दिलाने में सहायक होगा. यही वजह है कि मध्य प्रदेश में भी प्रियंका का झुकाव अनुभव की तरफ ज़्यादा था.

प्रियंका गांधीइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

क्यों गायब हो गई थी प्रियंका

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद प्रियंका काफ़ी सक्रिय थीं लेकिन जैसे-जैसे राहुल गांधी सक्रिय होते गए, प्रियंका राजनीतिक पटल से गायब होने लगीं. यहां तक कि अमेठी और रायबरेली में प्रियंका की चर्चा कम होने लगी.

दरअसल कांग्रेस के अंदर भी समय-समय पर ये मांग उठती रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी को टक्कर देने के लिए प्रियंका गांधी को कांग्रेस का चेहरा बनाया जाना चाहिए. लेकिन सोनिया गांधी सिर्फ़ राहुल गांधी को ही नेतृत्व का चेहरा बनाना चाहती थीं.

सोनिया गांधी बखूबी समझती हैं कि जैसे ही प्रियंका गांधी ने राजनीति मे कदम रखा वैसे ही भाई-बहन के बीच तुलना शुरू हो जाएगी. पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ जाएगी. जो कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित होगा. साथ ही प्रियंका गांधी के आने से राहुल गांधी के ग्राफ़ पर असर पड़ सकता है.

रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका गांधीइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES

रॉबर्ट वाड्रा पर भ्रष्टाचार के आरोप

प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. जानकार मानते हैं कि ये उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है. ये भी एक कारण है कि प्रियंका गांधी और कांग्रेस दोनों ही उनको सक्रिय राजनीति में आने से रोकती हैं.

राजनीति में प्रियंका के कदम बढ़ाते ही दूसरी पार्टियां रॉबर्ट वाड्रा को लेकर उन पर हमला बोल देंगी. इससे प्रियंका का नैतिक पक्ष कमजोर होगा.

प्रियंका के हेयरस्टाइल, कपड़ों के चयन और बात करने के तरीके पर गौर किया जाए तो उनमें इंदिरा गांधी की छाप साफ़ दिखती है. कार्यकर्ताओं से जुड़ने में प्रियंका माहिर है. भैयाजी के रूप में जाने जाने वाली प्रियंका को कार्यकर्ता आज भी हाथों हाथ लेते हैं.

अब कांग्रेस की तीन राज्यों में जीत ने राहुल गांधी को कांग्रेस का निर्विवाद रूप ‘चेहरा’ बना दिया है. जानकारों का मानना है कि प्रियंका की पर्दे के पीछे की भूमिका से कांग्रेस को ज़रूर मजबूती मिलेगी.

माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे ही सही प्रियंका की भूमिका लोकसभा चुनाव 2019 में बढ़ेगी और आने वाले समय में गांधी भाई-बहन एक और एक ग्यारह की भूमिका में दिख सकते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here