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Wednesday, December 11, 2019

Chhath Puja 2019 Chhathi Maiya: कौन हैं छठी मैया, इनकी पूजा से मिलते हैं ये 5 आशीर्वाद

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Chhath Puja 2019 Chhathi Maiya छठी मैया कौन हैं उनका स्वरूप कैसा है और उनकी पूजा करने से भक्तों को कौन-कौन से आशीर्वाद मिलते हैं?

Chhath Puja 2019 Chhathi Maiya: पूरे संसार को ऊर्जावान बनाए रखने वाले सूर्य देव की आराधना का महापर्व छठ 31 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में छठी मैया की पूजा का विशेष विधान है। उनकी पूजा से नि:संतानों के आंगन में किलकारियां गूंजती हैं, संतानों के जीवन की रक्षा होती है और वे खुशहाल रहते हैं। इस बार छठ पूजा 31 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 02 नवंबर तक चलेगी। कई लोगों को संभवत: इस बारे में ज्ञात न हो कि छठी मैया कौन हैं, उनका स्वरूप कैसा है और उनकी पूजा करने से भक्तों को कौन-कौन से आशीर्वाद मिलते हैं? आइए आज जानते हैं ज्योतिषाचार्य ज्योतिषाचार्य पं गणेश प्रसाद मिश्र से छठी मैया के बारे में—

कौन हैं छठी मैया

ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खंड में बताया गया है कि सृष्‍ट‍ि की अधिष्‍ठात्री प्रकृति देवी के एक प्रमुख अंश को ‘देवसेना’ कहा गया है। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इस देवी का एक प्रचलित नाम षष्‍ठी है। पुराण के अनुसार, ये देवी सभी ‘बालकों की रक्षा’ करती हैं और उन्‍हें लंबी आयु प्रदान करती हैं। आज भी ग्रामीण समाज में बच्‍चों के जन्‍म के छठे दिन षष्‍ठी पूजा या छठी पूजा का प्रचलन है।

”षष्‍ठांशा प्रकृतेर्या च सा च षष्‍ठी प्रकीर्तिता।

बालकाधिष्‍ठातृदेवी विष्‍णुमाया च बालदा।।

आयु:प्रदा च बालानां धात्री रक्षणकारिणी।|

सततं शिशुपार्श्‍वस्‍था योगेन सिद्ध‍ियोगिनी।।”

-(ब्रह्मवैवर्तपुराण,प्रकृतिखंड 43/4/6)

षष्‍ठी देवी को ही स्‍थानीय भाषा में छठी मैया कहा गया है। षष्‍ठी देवी को ‘ब्रह्मा की मानसपुत्री’ भी कहा जाता है।

मां कात्‍यायनी ही हैं छठी मैया

पुराणों में छठी मैया का एक नाम कात्‍यायनी भी है। इनकी पूजा नवरात्रि में षष्‍ठी तिथि‍ को होती है। शेर पर सवार मां कात्यायनी की चार भुजाएं हैं। व​ह बाएं हाथों में कमल का फूल और तलवार धारण करती हैं। वहीं, दाएं हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं। मां कात्यायनी योद्धाओं की देवी हैं। राक्षसों के अंत के लिए माता पार्वती ने कात्यायन ऋषि के आश्रम में ज्वलंत स्वरूप में प्रकट हुई थीं, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा।

सूर्य की बहन हैं छठी मैया

ऐसी भी मान्यता है कि छठी मैया भगवान सूर्य की बहन हैं। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है।

छठी मैया से मिलते हैं ये आशीर्वाद

1. छठी मैया का पूजा करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

2. छठी मैया संतान की रक्षा करती हैं और उनके जीवन को खुशहाल रखती हैं।

3. छठी मैया की पूजा से सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति होती है।

4. परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी छठी मैया का व्रत किया जाता है।

5. छठी मैया की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

नियम से व्रत न करने मिलता है कुफल

छठी मैया का नियम पूर्वक व्रत करने से व्रत सम्पूर्ण फल प्राप्त होता है। नियम को उल्लंघन करने से उसका कुफल भी मिलता है। पुराणों में बताया गया है कि राजा सगर ने सूर्य षष्ठी व्रत सही तरह से नहीं किया था इसलिए उनके 60 हजार पुत्र मारे गए थे।

Chhath Puja 2019 Date: 31 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है सूर्य की उपासना का महापर्व छठ, इस व्रत के हैं चार अहम पड़ाव

Chhath Puja 2019 Date: 31 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है सूर्य की उपासना का महापर्व छठ, इस व्रत के हैं चार अहम पड़ाव

Chhath Puja 2019 Date सूर्य की उपासना का महापर्व छठ का आरंभ 31 अक्टूबर दिन गुरुवार से हो रहा है जो 02 नवंबर दिन शनिवार तक चलेगा।

Chhath Puja 2019 Date: सूर्य की उपासना का महापर्व छठ का आरंभ 31 अक्टूबर दिन गुरुवार से हो रहा है, जो 02 नवंबर दिन शनिवार तक चलेगा। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि के सूर्योदय तक छठ पूजा का पर्व चलता है। मुख्य तौर पर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठी मैया की पूजा होती है। छठ पर्व दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाता है। छठ पूजा में विशेष तौर पर सूर्य और छठ मैया की पूजा की जाती है। उनकी पूजा से संतान प्राप्ति, संतान की रक्षा और सुख समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है। छठ मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है।

चार दिनों तक चलने वाला छठ महापर्व मुख्य तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। हालांकि अब इन क्षेत्रों के लोगों के देश के अन्य हिस्सों में रहने के कारण दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों में भी छठ पूजा की धूम देखने को मिलती है।

छठ पूजा में मुख्यत: चार पड़ाव होते हैं—

पहला दिन: नहाय खाय

दूसरा​ दिन: खरना और लोहंडा

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

चौथा दिन: ऊषा अर्घ्य, पारण का दिन

नहाय खाय- पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नहाय खाय 31 अक्टूबर दिन गुरुवार को है। जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को होता है।

खरना और लोहंडा- इस वर्ष खरना और लोहंडा 01 नवंबर दिन शुक्रवार को है। जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को होता है।

संध्या अर्घ्य- इस वर्ष डूबते सूर्य को दिया जाने वाला संध्या अर्घ्य 02 नवंबर दिन शनिवार को है। जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होता है। इसी दिन छठी मैया की विशेष पूजा भी होती है।

ऊषा अर्घ्य और पारण- इस वर्ष छठ पर्व में ऊषा अर्घ्य और पारण 03 नवंबर दिन रविवार को है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को होता है। इस दिन माताएं पारण कर व्रत पूर्ण करती हैं।

छठ पूजा के चारों दिनों व्रती के घर में भजन और लोकगीत गाए जाते हैं। मुख्यत: यह व्रत महिलाएं ही रखती हैं, लेकिन पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं। कठिन नियम और सयंम से व्रत पूर्ण करने पर संतान प्राप्ति और संतान की कुशलता का वरदान प्राप्त होता है। मनोवांछित कार्यों की सफलता के लिए पुरुष भी छठ मैया का व्रत रखते हैं।

Chhath Puja Samagri: पहली बार रखना है छठ पूजा का व्रत, तो इन सामग्रियों को लेना न भूलें

Chhath Puja Samagri: पहली बार रखना है छठ पूजा का व्रत, तो इन सामग्रियों को लेना न भूलें
Chhath Puja Samagri यदि आप पहली बार व्रत रखने वाली हैं तो आपको छठ पूजा सामग्री के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यहां देखें छठ पूजा सामग्री की लिस्ट।

Chhath Puja Samagri: सूर्य और छठी मैया की उपासना का महापर्व छठ 31 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है। संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना का यह व्रत रखने के लिए कई दिनों पहले से ही तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं। जिस तरह से हर व्रत के लिए विशेष पूजा सामग्री की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही छठ पूजा के लिए भी विशेष पूजा सामग्री की आवश्यकता पड़ती है। यदि आप पहली बार व्रत रखने वाली हैं तो आपको छठ पूजा सामग्री के बारे में जानकारी होनी चाहिए। यदि आपको इसके बारे में जानकारी नहीं है तो परेशान होने की आवयकता नहीं है। हम आपको बता रहे हैं कि छठ पूजा में किन-किन चीजों की आवश्यकता होती है, जिनका प्रबंध आप व्रत रखने से पूर्व ही कर लें तो आपके लिए सुविधाजनक होगा।

छठ पूजा सामग्री- साड़ी और पुरुषों के लिए कुर्ता-पजामा या जो उन्हें सुविधाजनक हो।

2. छठ पूजा का प्रसाद रखने के लिए बांस की दो बड़ी-बड़ी टोकरियां खरीद लें।

3. सूप, ये बांस या फिर पीतल के हो सकते हैं।

4. दूध तथा जल के लिए एक ग्लास, एक लोटा और थाली।

5. 5 गन्ने, जिसमें पत्ते लगे हों।

6. नारियल, जिसमें पानी हो।

7. चावल, सिंदूर, दीपक और धूप।

8. हल्दी, मूली और अदरक का हरा पौधा।

9. बड़ा वाला मीठा नींबू (डाभ), शरीफा, केला और नाशपाती।

10. शकरकंदी तथा सुथनी।

11. पान और साबुत सुपारी।

12. शहद।

13. कुमकुम, चंदन, अगरबत्ती या धूप तथा कपूर।

14. मिठाई।

15. गुड़, गेहूं और चावल का आटा।

गुड़ और गेहूं के आटे से बना ठेकुआ छठ पूजा का प्रमुख प्रसाद होता है, इसके बिना छठ पूजा अधूरी मानी जाती है। प्रसाद के रूप में चावल के आटे से बना लड्डू (जिसे स्थानीय भाषा में कसार कहते हैं।) भी चढ़ाया जाता है।

बांस की टोकरी में पूजा का सामान रखकर पुरुष उसे अपने सिर पर लेकर घाट तक पहुंचाते हैं। पूजा में गन्ना जरूर होना चाहिए, इसकी आवश्यकता अर्घ्य देने के समय पड़ती है। पूजा के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि कोई भी सामग्री जूठी न हो। साफ सामग्री का इस्तेमाल ही छठ पूजा में करें।

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