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Monday, May 20, 2019

Narasimha Jayanti 2019: भगवान विष्णु के 10 प्रमुख अवतारों में महत्वपूर्ण है नृसिंह अवतार,पूजन विधि एवं महत्व

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भगवान विष्णु के प्रमुख 10 अवतारों में नृसिंह अवतार भी शामिल है। भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की उसके पिता हिरण्यकश्यप से रक्षा के लिए नृसिंह अवतार लिया था।

Narasimha Jayanti 2019: भगवान विष्णु के प्रमुख 10 अवतारों में नृसिंह अवतार भी शामिल है। भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की उसके पिता हिरण्यकश्यप से रक्षा के लिए नृसिंह अवतार लिया था। जिस दिन श्रीहरि विष्णु ने यह अवतार लिया था, उस दिन वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी, तभी से इस तिथि को नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। नृसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण किया था। इस वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, नृसिंह जयंती 17 मई को है।

भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की कथा

कश्यप ऋषि के दो पुत्रों में से एक का नाम हिरण्यकश्यप था। उसने कठोर तपस्या से ब्रह्म देव को प्रसन्न कर आशीर्वाद प्राप्त किया था कि उसे कोई देवता, देवी, नर, नारी, असुर, यक्ष या कोई अन्य जीव मार नहीं पाएगा। न दिन में, न रात में, न दोपहर में, न घर में, न बाहर, न आकाश और न ही पाताल में, न ही अस्त्र से और न ही शस्त्र से। यह वरदान प्राप्त करके वह खुद को ईश्वर समझ बैठा था।

वह अपनी प्रजा को स्वयं की पूजा करने के लिए दबाव डालने लगा, जो उसकी पूजा नहीं करता उसे वह तरह तरह की यातनाएं देता था। वह भगवान विष्णु के भक्तों से चिढ़ता था। हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था, जिसका नाम प्रह्लाद था। वह भगवान विष्णु का परमभक्त था। जब इसकी जानकारी हिरण्यकश्यप को हुई तो उसने प्रह्लाद को समझाया। उसने अपने बेटे से कहा कि उसके पिता ही ईश्वर हैं, वह उनकी ही पूजा करे। लेकिन हिरण्यकश्यप के बार-बार मना करने पर भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी।

हिरण्यकश्यप ने इसे अपना अपमान समझ कर बेटे प्रह्लाद को मारने के लिए कई यत्न किए, लेकिन श्रीहरि विष्णु की कृपा से वह बच जाता। अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने के लिए मनाया। होलिका को वरदान मिला था कि आग से उसका बाल भी बांका नहीं होगा। लेकिन जब होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठी, तो श्रीहरि की कृपा से वह स्वयं उस आग में जल गई और प्रह्लाद बच गया। इसलिए होली के समय होलिका दहन होता है।

संसार को हिरण्यकश्यप के अत्याचार से मुक्ति दिलाने और भक्त प्रह्लाद के जीवन की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया। उन्होंने हिरण्यकश्यप को पकड़ लिया और संध्या वेला में घर की देहली पर अपनी जांघों पर उसे रखकर अपने तेज नखों से उसका कलेजा फाड़ डाला, जिससे वह स्वर्ग सिधार गया।

हिरण्यकश्यप से भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु आधे सिंह और आधे नर का स्वरूप धारण करके प्रकट हुए थे इसीलिए उनके इस अवतार को भगवान नृसिंह कहा गया।

Narasimha Jayanti 2019: नृसिंह चतुर्दशी व्रत वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है, जो इस वर्ष शुक्रवार 17 मई को है। इस दिन हिरण्यकश्यप से भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु आधे सिंह और आधे नर का स्वरूप धारण करके प्रकट हुए थे, इसीलिए उनके इस अवतार को भगवान नृसिंह कहा गया।

व्रत एवं पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह में सूर्य को साक्षी मानकर व्रत का संकल्प लें और तांबे के पात्र में जल लें।

नृसिंह देवदेवेश तव जन्मदिने शुभे।

उपवासं करिष्यामि सर्वभोगविवर्जित:।।

इस मंत्र से संकल्प करके मध्याह्न के समय नदी आदि पर जाकर क्रमश: तिल, गोमय, मृत्तिका और आँवले मलकर पृथक-पृथक चार बार स्नान करें। इसके बाद शुद्ध स्नान करके वहीं नित्य कृत्य करें। फिर घर आकर क्रोध, लोभ, मोह, मिथ्याभाषण, कुसंग और पापाचार आदि का सर्वथा त्याग करके ब्रह्मचर्य सहित उपवास करें।

सायंकाल एक वेदी पर अष्टदल बनाकर उस पर सिंह, नृसिंह और लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करके पूजन करें। रात्रि में गायन-वादन, पुराण श्रवण या हरि संकीर्तन से जागरण करें। दूसरे दिन फिर पूजन करें और ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करें। इस प्रकार प्रतिवर्ष करते रहने से नृसिंह भगवान उसकी सब जगह रक्षा करते हैं और धनधान्य देते हैं।

नृसिंह व्रत कथा (सारांश)

नृसिंह पुराण के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप का संहार करके नृसिंह भगवान कुछ शान्त हुए, तब भक्त प्रह्लाद ने पूछा, ‘ हे भगवन्! अन्य भक्तों की अपेक्षा मेरे प्रति अधिक स्नेह होने का क्या कारण है?’ तब भगवान ने कहा, ‘पूर्वजन्म में तू विद्या हीन, आचारहीन, वासुदेव नाम का ब्राह्मण था। एक बार मेरे व्रत के दिन ( वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) विशेष कारण वश तूने न जल पिया, न भोजन किया, न सोया और ब्रह्मचर्य से रहा। इस प्रकार स्वत: सिद्ध उपवास और जागरण हो जाने के प्रभाव से तू भक्तराज प्रह्लाद हुआ।

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