Home राज्य उत्तर प्रदेश बाबरी मस्जिद मामले के अभियुक्त महंत नृत्य गोपाल दास बने राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और महासचिव

बाबरी मस्जिद मामले के अभियुक्त महंत नृत्य गोपाल दास बने राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और महासचिव

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बाबरी मस्जिद मामले के अभियुक्त महंत नृत्य गोपाल दास बने राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और महासचिव

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को पहली बैठक हुई. इस बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को अध्यक्ष और चंपत राय को महासचिव नियुक्त किया गया.

राम जन्मभूमि न्यास परिषद के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास और विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, दोनों को ही सीबीआई ने 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने को लेकर आपराधिक साज़िश रचने के मामले में अभियुक्त बनाया था.

लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने मई 2017 में महंत नृत्य गोपाल दास, चंपत राय, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा प्रेम जी, महंत धर्म दास और सतीश प्रधान को ज़मानत दी थी.

इसी अदालत ने बाद में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर और उमा भारती समेत 12 अभियुक्तों पर भी आपराधिक साज़िश के आरोप तय किए थे.

विशेष अदालत में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के दो अलग-अलग मामले चल रहे हैं.

नृपेंद्र मिश्र को भी अहम पद

ट्रस्ट की पहली बैठक पहले ट्रस्टी वकील के परासरन के घर पर हुई. के परासरन के घर के पते पर ही राम मंदिर ट्रस्ट पंजीकृत किया गया है.

परासरन राम मंदिर विवाद में हिंदू पक्ष की ओर से प्रमुख वकील थे.

पहली बैठक में विश्व हिंदू परिषद के चंपत राय को ट्रस्ट का सचिव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र को मंदिर भवन निर्माण समिति का अध्यक्ष और गोविंद गिरी को कोषाध्यक्ष चुना गया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार अध्यक्ष चुने जाने के बाद महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि ‘राम मंदिर का मॉडल वही रहेगा लेकिन उसके प्रारूप में थोड़ा बदलाव किया जाएगा.’

महंत गोपाल दास ने कहा, ”लोगों की भावना का आदर किया जाएगा और हमारा प्रयास होगा कि जल्दी से जल्दी मंदिर का निर्माण हो.”

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर बधाई दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह फ़रवरी को संसद में इसकी जानकारी दी थी कि कैबिनेट ने राम मंदिर ट्रस्ट बनाने को मंज़ूरी दे दी है.

इससे पहले ट्रस्ट में महंत नृत्यगोपाल दास का नाम नही होने पर अयोध्या के संतों ने नाराज़गी जताई थी. संतों ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी थी. महंत नृत्य गोपाल दास शुरू से ही मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं. उन्हीं के मठ से मंदिर आंदोलन का संचालन होता था.

राम जन्मभूमि विवाद पर नौ नवम्बर को दिए अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने में ट्रस्ट बनाने को कहा था. इस ट्रस्ट का काम मंदिर निर्माण और उसके बाद मंदिर की देखरेख होगा. ये मियाद नौ फ़रवरी को ख़त्म होने वाली थी.

सर्वोच्च अदालत ने अपने फ़ैसले में भले ही निर्मोही अखाड़े को बाहर कर दिया था लेकिन उसने इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को रखने के निर्देश भी दिए थे.

प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद गृहमंत्री ने कहा था, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में 15 ट्रस्टी होंगे जिसमें से एक ट्रस्टी हमेशा दलित समाज से रहेगा. सामाजिक सौहार्द को मज़बूत करने वाले ऐसे अभूतपूर्व निर्णय के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अनेक अनेक बधाई देता हूँ.”

राम मंदिर ट्रस्ट की पहली बैठकइमेज कॉपीरइटANI

सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला

जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की संविधान पीठ ने 40 दिनों की सुनवाई के बाद पिछले साल नौ नवंबर को सर्वसम्मति से फ़ैसला सुनाया था.

फ़ैसले में विवादित स्थल पर पूजा के अधिकार को मंज़ूरी और मस्जिद के लिए पाँच एकड़ ज़मीन देने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण के लिए रास्ता तैयार कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद के लिए पाँच एकड़ उपयुक्त ज़मीन दिए जाने का आदेश दिया था.

अदालत ने कहा था कि सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड को दी जाने वाली ज़मीन 1993 के अयोध्या एक्ट के तहत अधिगृहीत की गई ज़मीन का हिस्सा हो सकती है या राज्य सरकार चाहे तो अयोध्या में किसी और उपयुक्त और प्रमुख भूखंड का चुनाव कर सकती है.

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