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Saturday, September 26, 2020

RSS Sangh Samagam: भारत में कुछ बुरा हुआ तो जिम्‍मेवारी हिन्‍दुओं की-संघ प्रमुख मोहन भागवत की खरी-खरी

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RSS Sangh Samagam राजधानी रांची के मोरहाबादी में रामदयाल मुंडा फुटबॉल स्‍टेडियम में बड़ी संख्‍या में स्‍वयंसेवक सरसंघचालक को सुनने पहुंचे। यहां RSS के दिग्‍गज जुटे हैं।

रांची-  RSS Sangh Samagam राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि भारतीयता और हिंदू एक-दूसरे के पर्याय और पूरक हैं। अपने देश की संस्कृति, परंपरा और विचारों का पूरा-पूरा प्रतिनिधित्व हिंदू शब्द करता है। ऐसे में हिंदुओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्हें राष्ट्र के निर्माण की जिम्मेदारी लेनी होगी। देश में अच्छा या बुरा जो भी होता है, उन सबकी जिम्मेदारी हिंदुओं को लेनी होगी।

उन्होंने आगे कहा कि देश को बढ़ाना है तो हिंदू को बढ़ाना होगा। आज विश्व को भारत की जरूरत है। हमें फिर विश्व गुरु बनना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी को अपना स्वार्थ छोड़कर आगे आना होगा। संघ प्रमुख गुरुवार को रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों को संबोधित कर रहे थे।

भारत आगे बढ़ेगा तो दुनिया का होगा भला

संघ प्रमुख ने कहा कि विश्व के कुछ देश मानते हैं कि राष्ट्र के बड़ा होने से विश्व को खतरा है। उन्होंने एक बार के अपने यूके प्रवास का संदर्भ देते हुए कहा कि मेरे संबोधन से पहले वहां कुछ लोगों ने मुझे सलाह दी थी कि यहां नेशलिज्म शब्द को लोग फासीवाद से जोड़कर देखते हैं। इस शब्द के प्रयोग से परहेज करते हैं। वह मानते हैं कि राष्ट्र का बड़ा होना अच्छा नहीं है। हमारा मानना इससे अलग है। इतिहास गवाह रहा है कि भारत जब-जब बड़ा हुआ है तब-तब दुनिया का भला ही हुआ है। आज दुनिया को भारत की जरूरत है। राष्ट्र के नाते भारत बड़ा होगा तो विश्व का कल्याण ही होगा।

भारत को विश्वगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता

सरसंघचालक ने कहा कि भारत में रहने वाले चाहे वे किसी भी पंथ, मत, भाषा और जाति के हों, सभी भारतीय संस्कृति से आपस में जुड़े हुए हैं। यह संस्कृति ही हिंदू है। विदेश में भी जब यहां के इस्लाम या ईसाईयत को मानने वाले जाते हैं तो उन्हें भी हिंदू ही कहा जाता है। मेरी बातें कुछ लोगों को खराब लगती हैं, लेकिन यहीं हकीकत है। यहां के लोगों का डीएनए 40 हजार वर्ष पुराना है। अंदर से सभी एक है। संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू कहने वालों को संगठित करने के लिए समाज को खड़ा करना होगा। जब समाज खड़ा होगा तो भारत को विश्व गुरु  बनने से कोई नहीं रोक सकता।

 

सेवा भावना से संघ से जुड़ें, सभी आएं आगे

इस मौके पर संघ प्रमुख ने समाज के लोगों से भी संघ से सेवा भाव के साथ जुडऩे की अपील की। समाज के प्रभावशाली लोगों, सेवानिवृत्त लोगों, छात्रों और बुद्धिजीवियों से समाज के लिए समय देने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सबके सम्मिलित प्रयास से भारत आगे बढ़ेगा। साथ ही यह नसीहत भी दी कि संघ से कोई आशा-प्रत्याशा, महत्वाकांक्षा या स्वार्थ भावना लेकर नहीं जुड़ें, बल्कि सेवा, समर्पण और त्याग की भावना के साथ जुड़ें।

नेशनलिज्म शब्द का उपयोग मत कीजिए, इसका मतलब होता है हिटलर, नाजीवाद

राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को रांची में स्वयंसेवकों के समागम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन में एक संघ कार्यकर्ता के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया। भागवत ने कहा कि नेशनलिज्म शब्द का उपयोग मत कीजिए। नेशन कहेंगे चलेगा, नेशनल कहेंगे चलेगा, नेशनलिटी कहेंगे चलेगा, नेशनलिज्म मत कहो। नेशनलिज्म का मतलब होता है हिटलर… नाजीवाद।

इस दौरान मोहन भागवत ने ये भी कहा, दुनिया के सामने इस वक्त आईएसआईएस, कट्टरपंथ और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे सबसे बड़ी चुनौती है। कार्यक्रम में मोहन भागवत ने ये भी कहा कि विकसित देश अपने व्यापार को हर देश में फैलाना चाहते हैं। इसके जरिए वो अपनी शर्तों को मनवाना चाहते हैं।

खुलापन हिन्दुओं की विशेषता है

बता दें कि इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्तंभकारों के एक समूह से कहा था कि खुलापन हिन्दुओं की विशेषता है और इसे बचाए रखा जाना चाहिए। भागवत ने कहा कि हिन्दू समाज को जागृत होना चाहिए, लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं होना चाहिए। भागवत ने दिल्ली के छत्तरपुर इलाकों में देशभर के 70 स्तंभकारों से बंद कमरे में संवाद किया और आरएसएस के बारे में फैलाई जा रही गलत धारणा को लेकर चर्चा की। आरएसएस प्रमुख के साथ बैठक में मौजूद कुछ स्तंभकारों ने इस संवाद को सार्थक बताया जिसमें विविध विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

हिन्दुओं को जागृत रहना है लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं

भागवत ने कहा, ‘खुलापन हिन्दुओं की विशेषता है और इसे बचाये रखा जाना चाहिए।’ भागवत ने हिन्दुओं को जागृत एवं सतर्क रहने पर जोर देते हुए कहा कि जब तक हिन्दू संगठित एवं सतर्क है, उसे कोई खतरा नहीं है। स्तंभकार के अनुसार, सरसंघचालक ने कहा, ‘हिन्दुओं को जागृत रहना है लेकिन किसी के विरूद्ध नहीं। उन्हें प्रतिक्रियावादी होने की जरूरत नहीं। हम किसी का वर्गीकरण नहीं करते हैं। हम किसी पर संदेह नहीं करते हैं।’

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और इसके खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भागवत ने कहा कि किसी भी कानून को नापसंद किया जा सकता है और उसमें बदलाव की मांग की जा सकती है, लेकिन इसके नाम पर न तो बसें जलाई जा सकती हैं और न ही सार्वजनिक संपत्ति को बर्बाद किया जा सकता है।

चार दिन रांची में रहेंगे भागवत

सरसंघचालक के संबोधन से पहले स्वयंसेवकों ने योग, व्यायाम, दण्ड प्रहार, सूर्य नमस्कार आदि का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, रांची के सांसद संजय सेठ एवं भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। भागवत बुधवार शाम को रांची पहुंचे। वे यहां 23 फरवरी तक रहेंगे। चार दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न वर्गों के साथ बैठकें होंगी।

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