अयोध्या में ‘राम मंदिर’ बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया यह अहम आदेश

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कोर्ट ने कहा कि खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले थे. सीजेआई ने यह भी कहा कि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू वहां राम चबूतरे और सीता रसोई पर पूजा होती रही थी.

नई दिल्ली: अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि बाहरी प्रांगण में हिंदू पूजा करते रहे हैं. हाईकोर्ट ने इस मामले के तीन हिस्से किए ये तार्किक नहीं है. कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने में मंदिर निर्माण की योजना बनाएं. कोर्ट ने ने मस्जिद के लिए अलग जमीन देने का आदेश दिया.

कोर्ट ने कहा, ‘मुस्लिम अपने साक्ष्यो से यह सिद्ध नहीं कर पाए की विवादित भूमि पर उनका ही एकाआधिकार था. इलाहाबाद हाईकोर्ट का वो आदेश जिसमें सुननी वक्फ बोर्ड को जमीन का बंटवारा का आदेश गलत था.’ कोर्ट ने कहा कि सरकार को ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाने की योजना तैयार करे. मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन दी जाए.

पांच जजों ने सर्वसम्मिति से फैसला सुनाया
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुबह 10.30 बजे अपना फैसला सुनाना शुरू किया. सीजेआई ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज की. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सभी पांच जजों ने सर्वसम्मिति से फैसला सुनाया है. फैसले की शुरुआत में सीजेआई ने कहा कि 30 मिनट में पूरा फैसला पढ़ा जाएगा.

1856-57 तक हिंदू करते रहे हैं पूजा
सीजेआई ने कहा कि 1856 से 57 तक उस स्थान पर हिंदुओं को पूजा करने से रोका नहीं गया था. सदियों से हिंदुओं द्वारा वहां पूजा किए जाना यह साबित करता है कि उनका विश्वास है उस स्थान पर रामलला विराजमान है.

ASI खुदाई में मिले दस्तावेजों को माना साक्ष्य
सीजेआई ने कहा बाबर के समय मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई थी. 1949 में दो मूर्तियां रखी गई थी. सीजेआई ने कहा कि बाबरी मस्जिद हिंदू स्ट्रक्चर के ऊपर बनाई गई. यह मस्जिद समतल स्थान पर नहीं बनाई गई. एसआई की खुदाई में 21वीं सदी में मंदिर के साक्ष्य मिले. सीजेआई ने कहा की खुदाई के साक्ष्यों को अनदेखा नहीं कर सकते हैं. खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले थे. सीजेआई ने यह भी कहा कि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू वहां राम चबूतरे और सीता रसोई पर पूजा होती रही थी…

….सीजेआई ने कहा है कि एएसाई की खुदाई में जो चीजें मिली हैं उसे हम खारिज नहीं कर सकते हैं. सीजेआई ने कहा कि खुदाई से मिले दस्तावेजों को खारिज नहीं कर सकते हैं. सीजीेआई ने कहा कि आस्था और विश्वास पर कोई सवाल नहीं है. सीजेआई ने कहा श्रीराम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था इसमें कोई शक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को कानूनी मान्यता दी.

अयोध्या केस: जानें सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मुस्लिम पक्ष को क्या मिला…

अयोध्या केस: जानें सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मुस्लिम पक्ष को क्या मिला...

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या में विवादित जमीन पर राम मंदिर बनेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम पक्ष को 5  एकड़ जमीन अलग से दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खास बातें –
-मुस्लिम अपने साक्ष्यों से यह सिद्ध नहीं कर पाए की विवादित भूमि पर उनका ही एकाआधिकार था.
-Ayodhya Verdict: CJI ने कहा, ‘खुदाई में इस्लामिक ढांचे के सबूत नहीं मिले’
-मुस्लिम यह साबित करने में नाकाम रहे कि इस जगह पर बाबरी मस्जिद बनने से पहले उनका अधिकार था.
-ASI की रिपोर्ट खारिज को नहीं कर सकते. ASI की रिपोर्ट में 12वीं सदी के मंदिर के सबूत मिले
-Ayodhya verdict: CJI ने कहा, ‘विवादित जमीन का बंटवारा नहीं किया जा सकता’
-ASI की रिपोर्ट से साबित होता है कि मस्जिद खाली जमीन पर नही बनाई गई थी.

अयोध्या केस: जानिए राम मंदिर को लेकर क्या रहे तीनों पक्षों के दावे

अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी. वहीं इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई.

अयोध्या/नई दिल्ली: अयोध्‍या केस (Ayodhya Case) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने वाला है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई थी. सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी.  वहीं इस मामले में 40 दिनों तक नियमित सुनवाई हुई. आपको बताते हैं कि इस केस को लेकर तीनों पक्षों, निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने क्या-क्या दलील रखी.

निर्मोही अखाड़ा: गर्भगृह में रामलला की पूजा निर्मोही अखाड़े ने शुरू की थी. पूजा स्थल की व्यवस्था निर्मोही अखाड़ा ही करता रहा है

रामलला विराजमान : अयोध्या में भगवान राम का बालरूप है, उसी की पूजा होती है. रामलला के सबसे करीबी मित्र कहे जाते हैं रामलला विराजमान

सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड: जहां मंदिर का दावा किया जाता है, वहां पर बाबरी मस्जिद थी.मुस्लिम वहां नमाज़ पढ़ते रहे हैं, इसलिये वहां फिर मस्जिद बने.

अयोध्या विवाद में मंदिर को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों की क्या है दलील

हिंदू: स्कंद पुराण में जन्मस्थान का ज़िक्र. ASI को मिला मंदिर का ढांचा. सदियों से लोग पूजा करते रहे हैं. ढांचे में कमल की आकृतियां मिलीं
मुस्लिम: 1949 में गुंबद के नीचे रखी मूर्ति. ढांचा मस्जिद का होना भी संभव. मूर्ति का प्रकट होना चमत्कार नहीं. कमल मुगल मेहराबों में भी होते हैं

भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: विवादित स्थल राम का जन्मस्थान. सदियों से भक्तों की अटूट आस्था
मुस्लिम: जन्मस्थान को लेकर ही विवाद है. जन्मस्थान का कोई सबूत नहीं.

पूजा और नमाज़ को लेकर दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: 1934 से नमाज़ नहीं पढ़ी गई जन्मस्थान पवित्र और पूज्य है
मुस्लिम: 1934 के बाद भी नमाज़ पढ़ी गई.1934 में मस्जिद पर हमला हुआ.

मालिकाना हक़ दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: राम का जन्मस्थान स्वयं में देवता. सदियों से पूजा हो रही है.
मुस्लिम: ग़लत एक्ट को आधार न बताया जाए. हिंदू पक्ष के पास सबूत नहीं हैं

बाबर को लेकर दोनों पक्षों की दलील

हिंदू: बाबर कभी अयोध्या नहीं आया. बाबर ने कोई मस्जिद नहीं बनवाई.
मुस्लिम: बाबरनामा में अयोध्या जाने का ज़िक्र. बाबरनामा में बाबरी मस्जिद का जिक्र

अयोध्या ज़मीन विवाद का नंबर गेम
वर्ष 1528: राम मंदिर गिराकर बाबरी मस्जिद बनवाई गई
वर्ष 1950: परमहंस रामचंद्र दास ने अदालत में अर्जी दी
वर्ष 1984:  VHP ने राममंदिर के लिए अभियान शुरू किया
वर्ष 1989: राजीव गांधी ने मंदिर का ताला खुलवाया
वर्ष 2011: अयोध्या ज़मीन विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
वर्ष 2017: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की
वर्ष 2019: 6 अगस्त से नियमित सुनवाई शुरू हुई
40 दिन: सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई चली
9 नवंबर 2019: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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