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Thursday, December 12, 2019

Tulsi Vivah 2019: देवउठनी एकादशी को करते हैं तुलसी विवाह? जानें पूजा विधि, लाभ एवं महत्व,बजेंगी शहनाइयां, जानें विवाह के शुभ मुहूर्त

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Tulsi Vivah 2019 हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह का आयोजन होता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 08 नवंबर 2019 दिन शुक्रवार को है।

Tulsi Vivah 2019: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह का आयोजन होता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 08 नवंबर 2019 दिन शुक्रवार को है। इस दिन तुलसी की भगवान शालिग्राम से विधिपूर्वक विवाह किया जाता है। कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुलसी का विवाह क्यों किया जाता है, इसके संदर्भ में एक पौराणिक कथा है, ​जिसमें वृंदा नाम की पतिव्रता स्त्री को भगवान विष्णु से शालिग्राम (पत्थर) स्वरुप में विवाह करने का वरदान प्राप्त हुआ था। विवाह के लिए शर्त थी कि वृंदा तुलसी का स्वरुप ले ले। वरदान के अनुसार, फिर तुलसी और शालिग्राम का विवाह हुआ।

तुलसी विवाह का महत्व

कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से बाहर आते हैं। उनके साथ सभी देवता भी योग निद्रा का त्याग कर देते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। फिर भगवान शालिग्राम और तुलसी का विवाह कराया जाता है। इस दिन से ही विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।

तुलसी विवाह से लाभ

एकादशी के दिन तुलसी और भगवान शालिग्राम की विधिपूर्वक पूजा कराने से वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याओं का अंत हो जाता है। जिन लोगों का विवाह नहीं हो रहा है, उन लोगों के रिश्ते पक्के हो जाते हैं। इतना ही नहीं, तुलसी विवाह कराने से कन्यादान जैसा पुण्य प्राप्त होता है।

तुलसी विवाह की विधि

 एकादशी के शाम को तुलसी के पौधे के गमला को गेरु आदि से सजाते हैं। फिर उसके चारों ओर ईख का मण्डप बनाकर उसके ऊपर ओढ़नी या सुहाग की प्रतीक चुनरी ओढ़ाते हैं। गमले को साड़ी में लपेटकर तुलसी को चूड़ी पहनाकर उनका श्रृंगार करते हैं।

इसके बाद भगवान गणेश आदि देवताओं का तथा शालिग्राम जी का विधिवत पूजन करके श्रीतुलसी जी की षोडशोपचार पूजा ‘तुलस्यै नमः’ मंत्र से करते हैं। इसके बाद एक नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखते हैं तथा भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी जी की सात परिक्रमा कराएं और आरती के पश्चात विवाहोत्सव पूर्ण करें।

तुलसी विवाह में हिन्दू विवाह के समान ही सभी कार्य संपन्न होते हैं। विवाह के समय मंगल गीत भी गाए जाते हैं। राजस्थान में तुलसी विवाह को ‘बटुआ फिराना’ कहते हैं। श्रीहरि विष्णु को एक लाख तुलसी पत्र समर्पित करने से वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है।

Dev Uthani Ekadashi 2019: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है, जो इस वर्ष 08 नवंबर दिन शुक्रवार को है। देवउठनी एकादशी को हरिप्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु योग निद्रा से निवृत हो जाते हैं और स्वयं को लोक कल्याण लिए समर्पित करते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन चतुर्मास का अंत हो जाता है। इसके बाद से ही विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं। इस दिन सभी देवता योग निद्रा से जग जाते हैं।

देवउठनी एकादशी मुहूर्त

एकादशी तिथि का प्रारंभ: 07 नवंबर को सुबह 09 बजकर 55 मिनट से।

एकादशी तिथि का समापन: 08 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 24​ मिनट तक।

देवउठनी के दिन करें भगवान विष्णु की आराधना

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु समेत सभी देवता योग निद्रा से बाहर आते हैं, ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु समेत अन्य देवों की पूजा की जाती है। देवउठनी एकादशी को तुलसी विवाह भी कराने का विधान है। इस दिन दान, पुण्य आदि का भी विशेष फल प्राप्त होता है।

देवउठनी एकादशी मंत्र

“उत्तिष्ठो उत्तिष्ठ गोविंदो, उत्तिष्ठो गरुणध्वज।

उत्तिष्ठो कमलाकांत, जगताम मंगलम कुरु।।”

आसान शब्दों में इसे कहते हैं: “देव उठो, देव उठो! कुंआरे बियहे जाएं; बीहउती के गोद भरै।।”

देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक नहीं होते मांगलिक कार्य

12 जुलाई दिन शुक्रवार को देवशयनी एकादशी थी, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले गए थे। देवशयनी एकादशी से चतुर्मास का प्रारंभ हो गया था, जो देवउठनी एकादशी तक रहता है। चतुर्मास में भगवान शिव सृष्टि के पालक होते हैं। इस दौरान विवाह, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।

साल भर में चौबीस एकादशी आती हैं, जिसमें देवउठनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी को प्रमुख एकादशी माना जाता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए।

Vivah Muhurat 2019: देवउठनी एकादशी से बजेंगी शहनाइयां, जानें विवाह के शुभ मुहूर्त

Vivah Muhurat 2019: देवउठनी एकादशी से बजेंगी शहनाइयां, जानें विवाह के शुभ मुहूर्त
Vivah Muhurat 2019 चार माह के बाद अब 08 नवंबर के बाद से शहनाइयां बजने लगेंगी। आइए जानते हैं कि इस साल के बचे दो महीनों में विवाह के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से हैं।

Vivah Muhurat 2019: इस वर्ष देवउठनी एकादशी 08 नवंबर दिन शुक्रवार को है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु योग निद्रा से जागेंगे, उनके साथ ही सभी देव योग निद्रा से बाहर आएंगे। 12 जुलाई दिन शुक्रवार को देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले गए थे, तब से चतुर्मास का प्रारंभ हुआ था। देवउठनी एकादशी के दिन से चतुर्मास का समापन हो जाता है और इस दिन से शादी, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहते हैं, इस दिन तुलसी और शालिग्राम के विवाह का भी प्रचलन है।

चार माह के बाद अब 08 नवंबर के बाद से शहनाइयां बजने लगेंगी। आइए जानते हैं कि इस साल के बचे दो महीनों में विवाह के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से हैं। यदि वाराणसी पंचांग को देखें तो देवउठनी एकादशी के दिन से ही विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो रहे हैं। वाराणसी पंचांग के अनुसार, नवंबर और दिसंबर में विवाह के कुल 12 शुभ मुहूर्त हैं। नवंबर में आठ और दिसंबर में चार विवाह मुहूर्त हैं।

नवंबर 2019 में विवाह के शुभ मुहूर्त

08 नवंबर, दिन शुक्रवार

09 नवंबर, दिन शनिवार

10 नवंबर, दिन रविवार

14 नवंबर, दिन गुरुवार

22 नवंबर, दिन शुक्रवार

23 नवंबर, दिन शनिवार

24 नवंबर, दिन रविवार

30 नवंबर, दिन शनिवार

दिसंबर 2019 में विवाह के शुभ मुहूर्त

05 दिसंबर, दिन गुरुवार

06 दिसंबर, दिन शुक्रवार

11 दिसंबर, दिन बुधवार

12 दिसंबर, दिन गुरुवार

वहीं आप मिथिला पंचांग को देखें तो उसके अनुसार नवंबर में विवाह का मुहूर्त 20 तारीख से शुरू हो रहा है। नवंबर में कुल 6 और दिसंबर में कुल 6 यानी दोनों महीनों में विवाह के कुल 12 शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं।

नवंबर 2019 में विवाह के शुभ मुहूर्त

20 नवंबर, दिन बुधवार

22 नवंबर, दिन शुक्रवार

24 नवंबर, दिन रविवार

27 नवंबर, दिन बुधवार

28 नवंबर, दिन गुरुवार

29 नवंबर, दिन शुक्रवार

दिसंबर 2019 में विवाह के शुभ मुहूर्त

01 दिसंबर, दिन रविवार

02 दिसंबर, दिन सोमवार

06 दिसंबर, दिन शुक्रवार

08 दिसंबर, दिन रविवार

11 दिसंबर, दिन बुधवार

12 दिसंबर, दिन गुरुवार

यदि हृषिकेश पंचांग को देखें तो उसके अनुसार, नवंबर में विवाह के 08 शुभ मुहूर्त हैं और दिसंबर में कुल 05 शुभ मुहूर्त हैं। नवंबर में 19 से 30 और दिसंबर में 12 तारीख तक ही विवाह के मुहूर्त हैं।

13 दिसंबर से लगेगा खरमास

12 दिसंबर के बाद एक माह के लिए खरमास लग जाएगा। फिर एक माह तक शादी, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। फिर 15 जनवरी यानी मकर संक्राति से विवाह आदि के शुभ मुहूर्त प्राप्त होंगे।

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