CAA ,NRCका विरोध सरकार को झुकने के लिए मजबूर करेगा-लखनऊ पहुंचा गांधी शांति मार्च ,य़शवंत बोले

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गांधी शांति यात्रा के सिलसिले में लखनऊ पहुंचे पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि पूरे देश में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ चल रहे आंदोलन की अनदेखी हो रही है। आज कई शहरों में महिलाओं का हुजूम इसके विरोध में सड़क पर है। घरेलू महिलाओं के इस स्वत:स्फूर्त आंदोलन में उनके साथ बच्चे भी शामिल हैं लेकिन सरकार उनसे बातचीत करना जरूरी नहीं मानती। महीने से अधिक वक्त हो गए इस आंदोलन को लेकिन सरकार उनसे संवाद नहीं कर रही। वे किस बात से नाराज हैं, उन्हें क्या डर सता रहा है, यह जानने की कोशिश नहीं हो रही है। उल्टे उनके ऊपर कार्रवाई हो रही है। उनके कंबल छीने जा रहे हैं उनके लिए सुविधाएं जुटाने वालों पर कार्रवाई हो रही है।

सरकारी मौन से नहीं दबेगा महिलाओं का विरोध

देश भर में शाहीनबाग की तर्ज पर चल रहे आंदोलन के भविष्य के बारे में आउटलुक के एक सवाल के जवाब में पूर्व वित्तमंत्री ने कहा, “देश के अलग-अलग शहरों में महिलाओं के विरोध को सरकारी मौन से दबाया नहीं जा सकता। महिलाएं और बच्चों का ये संघर्ष जरूर कामयाब होगा। उनका ये संघर्ष क्या स्वरूप लेगा, ये कब तक चलेगा यह तो मैं नहीं बता सकता लेकिन यह तय है कि ऐसे आंदोलन के सामने सरकारें झुकती रही हैं। इस आंदोलन का भविष्य जो हो पर ये तय है कि सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध के लिए खड़ा ये आंदोलन आखिरकार सरकार को झुकने पर मजबूर करेगा।”

देश इस वक्त बेहद खतरनाक आर्थिक दौर से गुजर रहा है

पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि सरकार को देश की खराब हो रही अर्थव्यवस्था की कोई चिंता नहीं। देश इस वक्त बेहद खतरनाक आर्थिक दौर से गुजर रहा है। भारत लगभग दिवालिया होने के कगार पर है। बल्कि दिवालिया हो चुका है। इस सरकार ने रिजर्व बैंक के खजाने को लूटकर कुछ खास उद्योगपतियों के 145 हजार करोड़ का कॉरपोरेट टैक्स छूट दे दिया। सरकार के इस काम ने देश के दिवालिएपन को पुख्ता कर दिया है। लेकिन सरकार इस पर मौन है। हमें अच्छा लगता कि  इस वक्त हम देश की अर्थव्यवस्था पर बात करते। लेकिन आज देश को सीएए, एनआरसी और एनपीआर की बहस में उलझा दिया गया है। सरकार ऐसे मुद्दे खड़े कर देश का ध्यान भटकाने और समाज को उलझाने की कोशिश में जुटी है। लखनऊ में आकर देश के गृहमंत्री जब ये कहते हैं कि डंके की चोट पर वे यह सब करना चाहते हैं, तो देश को उनकी मंशा समझ में आती है। आज सत्ता पर घमंड इस कदर छाया है कि वे कुछ भी कर सकते हैं। लोकतंत्र में ऐसी बात, ऐसी भाषा किसी को मंजूर नहीं हो सकती।

मौलिक ढांचे के विपरीत है सीएए

यशवंत सिन्हा ने कहा, “सीएए को लेकर मेरा नजरिया बिल्कुल साफ है। यह संविधान के मौलिक ढांचे के विपरीत है। दूसरी बात इस कानून की जरूरत ही नहीं थी। पहले से मौजूद कानून में सरकार के पास पूरे अधिकार थे कि वह अपने विवेक से अन्य देश के नागरिकों के लिए भारतीय नागरिकता के विकल्प पर विचार कर सकती थी। लेकिन ऐसा करने के बजाय सरकार ने इसके जरिए टकराव का रास्ता चुना ताकि वोट की पालिटिक्स को धार दे सके। सिन्हा ने कहा कि इस कानून को लागू करने में अभी कई अड़चनें हैं और सरकार की मंशा इसे लागू करने की है भी नहीं।”

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