W. BENGAL: पीएम मोदी ने बांग्लादेश का नाम क्यों नहीं लिया?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के दौरे पर दूसरे दिन बेलूर मठ में छात्रों को संबोधित करते हुए एक बार फिर से नागरिकता संशोधन क़ानून पर सरकार का पक्ष रखा और इसका बचाव किया.

पीएम मोदी ने कहा कि नागरिकता संशोधन क़ानून किसी की नागरिकता ख़त्म करने के लिए नहीं है बल्कि देने के लिए है.

पीएम मोदी ने कहा, ”इतनी स्पष्टता के बावजूद कुछ राजनीतिक कारणों से नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा है. पाकिस्तान में जिस तरह दूसरे धर्मों के लोगों पर अत्याचार होता है, उस पर आवाज़ हमारा युवा ही उठा रहा है. नागरिकता क़ानून में यह संशोधन हम न लाते तो न ये विवाद छिड़ता और न ये पता चलता कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर किस तरह से अत्याचार हुए हैं.”

बेलूर मठ में पीएम नरेंद्र मोदीइमेज कॉपीरइटTWITTER/@PMOINDIA

उन्होंने कहा, ”अब पाकिस्तान को जवाब देना होगा कि पिछले 70 सालों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार क्यों हुआ. महात्मा गांधी ने जो कहा था हम वही कर रहे हैं. हमने पूर्वोत्तर भारत के लिए ख़ास प्रावधान किए हैं ताकि उनकी मौलिकता प्रभावित नहीं हो.”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”मैंने यह क़ानून कोई रातोरात नहीं बना दिया है. यह क़ानून नागरिकता छीनने के लिए नहीं है बल्कि देने के लिए है. सीएए उन अल्पसंख्यकों के लिए है जिन पर पाकिस्तान में अत्याचार हुआ है. क्या हमें उन्हें नागरिकता नहीं देनी चाहिए? क्या हम इन्हें मरने के लिए पाकिस्तान भेज दें?”

बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. एके अब्दुल मोमेनइमेज कॉपीरइटGETTY IMAGES
Image captionबांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. एके अब्दुल मोमेन

बांग्लादेश का नहीं लिया नाम

नागरिकता संशोधन क़ानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 के पहले आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की बात है लेकिन पीएम मोदी ने अपने भाषण में केवल पाकिस्तान की आलोचना की. उन्होंने बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान का नाम नहीं लिया.

एनआरसी और सीएए को लेकर बांग्लादेश-भारत के रिश्तों में तनाव हैं. बांग्लादेश के विदेश मंत्री और गृह मंत्री पहले भारत का दौरा रद्द कर चुके हैं. इससे पहले बांग्लादेश ने कहा था कि उसके यहां अल्पसंख्यकों पर कोई अत्याचार नहीं हुआ है.

बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. एके अब्दुल मोमेन ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के आरोप पर कहा था, ”बांग्लादेश में हमारी सरकार में अल्पसंख्यकों का कोई उत्पीड़न नहीं हुआ. हां, ये सही है कि सैन्य शासन और अन्य सरकारों के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों का छोटे स्तर पर उत्पीड़न हुआ है. 2001 में अल्पसंख्यकों के साथ हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं का भी उत्पीड़न हुआ है.”

विदेश मंत्री मोमेन ने यह भी कहा कि भारत की कुछ राजनीतिक पार्टियां अपने हित के लिए एनआरसी में बांग्लादेश का नाम ले रही हैं.

भारत में एनआरसी और नए नागरिकता क़ानून का मुद्दा बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी बीएनपी भी उठा रही है. बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनल पार्टी के महासचिव मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा है कि भारत के असम राज्य में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न यानी एनआरसी से बांग्लादेश की आज़ादी और संप्रभुता को ख़तरा है.

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पश्चिम बंगाल में विरोध

नरेंद्र मोदी शनिवार की रात हावड़ा स्थित रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय में ही रहे. प्रधानमंत्री ने कहा कि बेलूर मठ किसी तीर्थस्थान से कम नहीं है. आज स्वामी विवेकानंद की जयंती है और इस मौक़े पर भारत में युवा दिवस मनाया जाता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकता संशोधन क़ानून पर भ्रम फैलाया जा रहा है और इसे युवा ही दूर कर रहे हैं.

रामकृष्ण मिशन में पीएम मोदी ने विवेकानंद की 157वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी.

पीएम मोदी के कोलकाता पहुंचने पर नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ इस दौरे का विरोध भी हुआ. कोलकाता में कई जगहों पर लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का विरोध किया.

पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुलाक़ातइमेज कॉपीरइटANI
Image captionपीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुलाक़ात

कोलकाता के धर्मताला में प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में जुटे थे. ज़्यादातर प्रदर्शनकारी कांग्रेस और वामपंथी दलों के हैं. तृणमूल कांग्रेस की छात्र ईकाई भी सीएए को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है. पीएम मोदी के शनिवार को कोलकाता पहुंचने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनकी शिष्टाचार मुलाक़ात भी हुई. इस मुलाक़ात के बाद ममता भी प्रदर्शन में शामिल होने चली गई थीं.

पश्चिम बंगाल में कई लोगों ने पीएम मोदी और सीएम ममता की मुलाक़ात की भी आलोचना की है.

हालांकि, ममता ने इस मुलाक़ात का बचाव करते हुए कहा, ”पीएम के बंगाल आने पर यह एक शिष्टाचार मुलाक़ात थी. मैंने प्रधानमंत्री से कह दिया है कि बंगाल के लोग सीएए, एनआरसी और एनपीआर को स्वीकार नहीं करेंगे. मैंने उनसे इन पर फिर से विचार करने के लिए कहा है.”

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